गढ़वा में अब 'काम क्यों नहीं हुआ' का भी देना होगा हिसाब: डीसी ने तय की अफसरों-शिक्षकों की जवाबदेही, खराब प्रदर्शन पर रुकेगा वेतन

गढ़वा डीसी पशुपति नाथ मिश्रा ने सरकारी कामकाज में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही तय करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

गढ़वा. सरकारी कामकाज में अब केवल प्रगति रिपोर्ट देना पर्याप्त नहीं होगा. काम क्यों नहीं हुआ, देरी किस स्तर पर हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है, इसका भी जवाब देना होगा. उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने शिक्षा और कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही तय करने को लेकर सख्त निर्देश दिये हैं.

प्रधानाध्यापक और शिक्षकों की जवाबदेही

शिक्षा विभाग में इसका सीधा असर विद्यालयों के कामकाज पर पड़ेगा. निर्धारित मानकों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करने वाले विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और संबंधित शिक्षकों की जवाबदेही तय की जायेगी. डीसी ने अपेक्षित सुधार और निर्धारित लक्ष्य हासिल होने के बाद ही वेतन भुगतान की स्वीकृति देने का निर्देश दिया है.

नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण

बीईईओ, बीपीओ/बीपीएम, बीआरपी और सीआरपी को नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करना होगा. जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक अपने अधीनस्थ पदाधिकारियों व कर्मियों की उपस्थिति की नियमित समीक्षा करेंगे. मासिक परिलब्धि का भुगतान दर्ज उपस्थिति के आधार पर ही करने का निर्देश दिया गया है.

अब निगरानी सिर्फ निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी. निरीक्षण के बाद विद्यालय के प्रदर्शन में कितना सुधार हुआ, इसकी भी समीक्षा होगी.

योजनाएं लंबित रहीं तो पूछी जायेगी वजह

कल्याण विभाग की लंबित योजनाओं को भी जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है. इसमें बिरसा आवास, सरना स्थल घेराबंदी, कब्रिस्तान घेराबंदी, मसना और धूमकुड़िया भवन निर्माण जैसी योजनाएं शामिल हैं. लाभुकों को किये गये भुगतान का किस्तवार स्पष्ट प्रतिवेदन भी मांगा गया है. इसके अलावा मुख्यमंत्री रोजगार सृजन योजना, वन अधिकार अधिनियम 2006 और प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम की भी समीक्षा की गयी. पूर्व से निष्क्रिय पड़े आवंटनों को री-वैलिडेट कराने तथा पिछले वित्तीय वर्ष में लैप्स हुए आवंटनों की मांग के लिए पत्राचार करने का निर्देश दिया गया.

अगली समीक्षा में मौजूद रहेंगे संबंधित विभाग

उपायुक्त ने अगली समीक्षा बैठक में कल्याण विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े सभी संबंधित विभागों के पदाधिकारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. इससे योजनाओं के लंबित रहने पर जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की गुंजाइश कम होगी. जिस स्तर पर काम रुका है, संबंधित अधिकारी को अपनी भूमिका स्पष्ट करनी होगी.

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अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही भी तय

डीसी के निर्देशों के बाद अब अगली समीक्षा बैठक महत्वपूर्ण होगी. इसमें केवल योजनाओं की प्रगति ही नहीं, बल्कि काम में देरी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मियों की जवाबदेही भी तय होने की उम्मीद है.

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By Avinash singh

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