पीयूष तिवारी
गढ़वा : राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में झारखंड के मेधावी छात्रों ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. मूल रूप से रांची के रहने वाले और वर्तमान में गढ़वा के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) मयंक भूषण के पुत्र ज्ञानेंद्र गर्व ने नीट परीक्षा में अखिल भारतीय स्तर पर 676वीं रैंक हासिल की है. ज्ञानेंद्र की इस सफलता से हजारीबाग और गढ़वा दोनों ही जिलों के प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में हर्ष का माहौल है.
99 फीसदी अंकों के साथ इंटरमीडिएट में रहे थे टॉपर
ज्ञानेंद्र गर्व की प्रारंभिक सफलता की नींव उनके मजबूत शैक्षणिक आधार में छिपी हैं ,उन्होंने रांची के प्रतिष्ठित डीएवी श्यामली से इंटरमीडिएट (विज्ञान) की परीक्षा 99 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की थी इसके बाद उन्होंने डॉक्टर बनने के अपने सपने को साकार करने के लिए रांची स्थित आकाश इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया. संस्थान के शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन और अपनी कड़ी मेहनत के बल पर उन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक में यह शानदार रैंक अर्जित की है.
माता-पिता के त्याग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को दिया श्रेय
अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ज्ञानेंद्र ने इसका श्रेय अपने माता-पिता और गुरुजनों को दिया है. ज्ञानेंद्र ने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी के रूप में व्यस्त दिनचर्या के बावजूद उनके पिता और माता ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया. रांची में पढ़ाई के दौरान आकाश इंस्टीट्यूट के शिक्षकों ने जो रणनीति और मार्गदर्शन दिया, उसी की बदौलत आज वे इस मुकाम पर पहुँच सके हैं। ज्ञानेंद्र गर्व ने कहा कि उनका अंतिम लक्ष्य केवल एक सफल डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता की सेवा करना है. उन्होंने बताया कि पिता के प्रशासनिक सेवा में होने के कारण उन्होंने समाज के जमीनी स्तर और अभावों को बेहद करीब से देखा है. पीयूष तिवारी
