बड़गड़. धूमकुड़िया भवन, सालो के प्रांगण में अखिल भारतीय आदिवासी महासभा, बड़गड़ के तत्वावधान में प्रखंड स्तरीय करम महोत्सव पारंपरिक उल्लास और उत्साह के साथ मनाया गया. विभिन्न गांवों से पहुंचे लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ करम पर्व मनाया. सामूहिक करम नृत्य और पारंपरिक गीत-संगीत से अखड़ा देर तक गुलजार रहा. महोत्सव में व्रतधारियों ने जंगल से विधि-विधान के साथ करम डाली लाकर अखड़ा में स्थापित की. इसके बाद व्रतधारी युवतियों ने करम डाली की पूजा-अर्चना की. कथाकार ने कर्मा-धर्मा की पारंपरिक कथा सुनाते हुए करम पर्व के सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, झारखंड सरकार के सचिव दिलीप कुमार तिर्की ने कहा कि करम पर्व भाई-बहन के प्रेम और आपसी सद्भाव का पर्व है. यह प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का संदेश भी देता है. कर्मा-धर्मा की कथा मनुष्य को कर्म के महत्व की याद दिलाती है और यह संदेश देती है कि कर्म के अनुरूप ही फल की प्राप्ति होती है.
अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष जेपी मिंज ने आदिवासी समाज के समक्ष वर्तमान चुनौतियों का उल्लेख किया. उन्होंने डिलिस्टिंग और सीटों के परिसीमन को प्रमुख मुद्दा बताते हुए समाज में इन विषयों को लेकर जागरूकता और संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बड़गड़ थाना प्रभारी राजेश कुमार वर्मा उपस्थित थे.
मौके पर महासभा के बड़गड़ सचिव संजय कुजूर, केंद्रीय सचिव फिलिप कुजूर, टागरेन केरकेट्टा, केंद्रीय सदस्य ज्योति लकड़ा व सुनील मिंज, विश्राम बाखला, विश्वनाथ बाखला, अजय कुमार मिंज, दया किशोर मिंज, अनमोल तिर्की, असवंती तिर्की, उर्मिला मिंज, सुनीता तिर्की, शिलानंद केरकेट्टा, पीटर तिर्की, सुमन तिर्की, प्रवीणा मिंज, बसंती खलखो, विजय तिर्की सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी, सदस्य और ग्रामीण उपस्थित थे.
कार्यक्रम का संचालन पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मिंज ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महासभा, बड़गड़ के अध्यक्ष पृथ्वी टोप्पो ने किया. समापन अवसर पर विभिन्न गांवों से आए लोगों ने पारंपरिक गीत-संगीत और करम नृत्य प्रस्तुत किया.
