बांधों की बदहाली से सिंचाई ठप, किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट
Copied link
10 जून से पहले मरम्मत नहीं हुई, तो हजारों एकड़ खेत रह जायेंगे परती प्यासे
10 जून से पहले मरम्मत नहीं हुई, तो हजारों एकड़ खेत रह जायेंगे परती प्यासे
संदीप कुमार, केतार केतार प्रखंड क्षेत्र की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाएं, जो कभी प्रखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हुआ करती थीं, आज प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के कारण बदहाली के आंसू रो रही हैं. आलम यह है कि महत्वपूर्ण बांधों के क्षतिग्रस्त होने और समय पर उनकी मरम्मत नहीं होने से हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई ठप है. इससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है. पाचाडुमर में वर्ष 1990 में निर्मित भुरानी बांध पिछले साल 13 अगस्त को आयी भीषण बाढ़ में बह गया था. यह बांध आसपास के लगभग 500 एकड़ खेतों में धान और गेहूं की फसल के लिए जीवनदायिनी था. बांध टूटे लगभग एक साल होने को है, लेकिन अब तक इसकी सुध नहीं ली गयी है.
किसान भोला साह, विमलेश पासवान, मुंशी चौधरी, करेशन चौधरी और यमुना साह ने कहा कि अगर 10 जून (मानसून की आहट) से पहले मरम्मत नहीं हुई, तो इस साल भी खेत परती रह जायेंगे. सिर्फ भुरानी बांध ही नहीं, बल्कि प्रखंड के कई अन्य जलाशय भी सरकारी तंत्र की विफलता की कहानी बयां कर रहे हैं. आसनाबांध (परसोडीह) पिछले एक दशक से क्षतिग्रस्त है. अमराहीदह बांध (ताली गांव, मुकुंदपुर) 10 वर्षों से टूटे होने के कारण बेकार पड़ा है. किसानों का आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी धरातल की वास्तविक समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं. उनका कहना है कि सिंचाई जैसी बुनियादी जरूरत को छोड़कर गैर-जरूरी योजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है. व्यवस्था से तंग आकर अब प्रखंड के किसान धीरे-धीरे खेती से दूरी बनाने को मजबूर हो रहे हैं. किसानों का कहना है कि प्रखंड के किसान पूरी तरह कृषि पर निर्भर हैं. सिंचाई व्यवस्था चरमराने से किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है. प्रशासन से किसानों की मांग है कि मानसून शुरू होने से पहले सभी क्षतिग्रस्त बांधों की मरम्मत करायी जाये.
Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.