अच्छी शिक्षा व संस्कार ही जीवन को दिशा देते हैं : डीसी

अच्छी शिक्षा व संस्कार ही जीवन को दिशा देते हैं : डीसी

गढ़वा. आरके पब्लिक स्कूल गढ़वा का 31वां वार्षिकोत्सव रविवार देर शाम मनाया गया. समारोह में विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियों से अतिथियों और अभिभावकों को काफी प्रभावित किया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपायुक्त शेखर जमुआर ने कहा कि अच्छी शिक्षा और संस्कार ही व्यक्ति के जीवन को दिशा देते हैं. समाज को शिक्षित और संस्कारवान बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है. आरके पब्लिक स्कूल इस दिशा में बेहतर कार्य कर रहा है. उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए बच्चों को कठिन परिश्रम, समर्पण और इच्छाशक्ति से जीवन में आगे बढ़ने की सीख दी. विशिष्ट अतिथि एसडीओ संजय कुमार ने कहा कि बच्चों को बेहतर शिक्षा, संस्कार और सकारात्मक मार्गदर्शन देना हर अभिभावक का कर्तव्य है. जब नींव मजबूत होगी, तभी वे भविष्य में सफल होंगे. समारोह में विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना, गणेश स्तुति, स्वागत गान, पर्व-त्योहारों पर आधारित नृत्य, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ विषय पर नाट्य प्रस्तुति, मोबाइल के दुष्प्रभाव पर जागरूकता कार्यक्रम, फोल्क डांस, पिरामिड शो और गायन जैसे कार्यक्रमों से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी. संस्कारयुक्त शिक्षा स्कूल की प्राथमिकता : स्कूल के निदेशक अलख नाथ पांडेय ने स्वागत भाषण में कहा कि स्थापना के समय से ही अनुशासन, गुणवत्ता और संस्कारयुक्त शिक्षा उनकी प्राथमिकता रही है. आज स्कूल के छात्र-छात्राएं देश-विदेश में विभिन्न प्रतिष्ठित क्षेत्रों आइपीएस, आईएएस, मेडिकल, इंजीनियरिंग, सेना और शिक्षा में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. सम्मानित किया गया : इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में सेवा दे रहे स्कूल के पूर्व छात्रों व उनके अभिभावकों के साथ ही पूर्व प्राचार्य एसएलके दास और कैप्टन शालीग्राम पांडेय को सम्मानित किया गया. अक्षरा सिकरवार को बेस्ट स्टूडेंट ऑफ द ईयर और तमीम आलम को बेस्ट अटेंडेंस का पुरस्कार प्रदान किया गया. इनका रहा योगदान : कार्यक्रम की सफलता में प्राचार्य संतोष पाण्डेय, अनुप कुमार पाण्डेय, देवेंद्र सिंह, राजेश कुमार, विकास तिवारी, शहेला खान, अनिता सिन्हा, गीता पांडेय, रंजीत कुमार व इम्तियाज खान का सक्रिय योगदान रहा.

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नगर निकाय चुनाव में नहीं चला विधानसभा का गणितगढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस व राजद को उम्मीद से कम मिले मत- अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने चौंकाया- पिछले मत प्रतिशत को बरकरार नहीं रख सके बड़े दलपीयूष तिवारी, गढ़वागढ़वा नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों और उनके जीत-हार के समीकरणों की चर्चा शहर के नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर तेज हो गयी है. बिना किसी दल और बड़े नेताओं के समर्थन के दौलत सोनी की अध्यक्ष पद पर जीत ने सभी को चौंका दिया है. इस चुनाव में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाजपा जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. लेकिन परिणामों ने इन दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. करीब 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन दलों को जो मत मिले थे, उन्हें वे अपने समर्थित प्रत्याशियों के माध्यम से बरकरार नहीं रख सके. सबसे खराब स्थिति भाजपा की रही है. विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा शहर के 33 बूथों में से 30 बूथों पर पहले स्थान पर रही थी. शहरी क्षेत्र से पार्टी को 15 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे. इसके विपरीत नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी कंचन जायसवाल को मात्र 2582 मत मिले. यदि भाजपा के बागी प्रत्याशी अलखनाथ पांडेय को मिले 2701 मत भी जोड़ दिये जाएं, तो कुल आंकड़ा लगभग 5300 तक ही पहुंचता है. यह संख्या विधानसभा चुनाव में मिले मतों की तुलना में काफी कम है.पिछले निकाय चुनाव के मत भी नहीं बचा सकी भाजपावर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में अलखनाथ पांडेय की पत्नी मीरा पांडेय ने भाजपा के टिकट पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था. उन्हें 6899 मत मिले थे. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले विनोद जायसवाल (2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पति) को 3810 मत प्राप्त हुए थे. वर्तमान चुनाव में ये दोनों ही परिवार अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके. न तो विधानसभा चुनाव में मिले मतों को बरकरार रख पाये और न ही पिछले निकाय चुनाव के आंकड़े तक पहुंच सके.झामुमो और कांग्रेस का गठजोड़ भी नहीं दिला सका जीतगढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो ने संतोष केसरी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया. दो बड़े दलों के समर्थन के बावजूद संतोष केसरी को मात्र 3790 मत प्राप्त हुए. वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने के कारण संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी अध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं. तब उन्हें 6411 मत मिले थे और वे भाजपा प्रत्याशी थीं. उसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमर सफदर को केवल 420 मत प्राप्त हुए थे. दोनों दलों को उम्मीद थी कि संयुक्त रूप से वे करीब सात हजार मत प्राप्त कर संतोष केसरी को जीत दिला देंगे. लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी.54 मतों से हारने वाली अनिता दत्ता को इस बार केवल 215 मतवर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में झामुमो की प्रत्याशी अनिता दत्ता को 6357 मत मिले थे. वे मात्र 54 मतों के अंतर से पिंकी केसरी से हार गयी थीं. इस बार अनिता दत्ता को किसी दल का समर्थन नहीं मिला और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं. लेकिन उन्हें केवल 215 मतों से ही संतोष करना पड़ा.राजद भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफलनगर परिषद चुनाव 2026 में राजद ने विकास माली को समर्थन दिया. विकास माली को 1222 मत प्राप्त हुए. जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में राजद समर्थित प्रत्याशी मनिका नारायण को 5117 मत मिले थे. वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए राजद प्रत्याशी मो शमीम को 2018 में 3728 मत प्राप्त हुए थे. कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने दलों की बजाय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी. बड़े दलों की रणनीति और पुराने मत प्रतिशत इस चुनाव में कारगर साबित नहीं हुए.

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