गढ़वा: देश के आकांक्षी जिलों में शामिल गढ़वा की पहचान अब सिर्फ भौगोलिक चुनौतियों या पिछड़ेपन से नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को महिलाओं के दम पर मजबूत करने की कोशिशों से हो रही है. जिले में चल रही योजनाओं की जमीनी समीक्षा के दौरान उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिले के प्रत्येक पात्र परिवार को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए. यह केवल एक प्रशासनिक निर्देश भर नहीं है, बल्कि आकांक्षी जिला गढ़वा में गरीबी उन्मूलन और महिला नेतृत्व वाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है. यह भी पढ़ें : Latehar News: नक्सल प्रभावित क्षेत्र के 20 युवाओं को मिलेगा मोटर ड्राइविंग का प्रशिक्षण, SSB ने शुरू किया 26 दिवसीय कार्यक्रम
उपायुक्त ने साफ किया है कि केवल समूहों का गठन कर देना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है. जब तक इन समूहों को नियमित प्रशिक्षण, क्षमता विकास और निरंतर मार्गदर्शन नहीं मिलेगा, तब तक वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर नहीं हो सकते. उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिलाओं को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर सूक्ष्म उद्यमों, प्रसंस्करण और स्थानीय बाजार की मांग के अनुरूप उत्पादन से जोड़ा जाए. इसके साथ ही क्रेडिट लिंकेज और वित्तीय साक्षरता को धरातल पर उतारने पर जोर दिया गया, ताकि बैंक ऋण और सरकारी अनुदान का सही उपयोग हो सके और ग्रामीण महिलाओं की आय में सीधी वृद्धि हो.
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नीति आयोग के आकांक्षी जिला कार्यक्रम के तहत सामाजिक विकास और आजीविका संवर्धन दो बेहद महत्वपूर्ण मानक हैं. गढ़वा जैसे सुदूर क्षेत्र में जब तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार का जुड़ाव आजीविका मिशन से नहीं होगा, तब तक प्रति व्यक्ति आय और जीवन स्तर के सूचकांक में बड़ा बदलाव संभव नहीं है. उपायुक्त का यह रुख स्पष्ट करता है कि प्रशासन अब योजनाओं के केवल कवरेज पर नहीं, बल्कि परिणाम आधारित आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.
यदि यह विशेष अभियान सही तालमेल और समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतरता है, तो आने वाले दिनों में गढ़वा की ग्रामीण महिलाओं की आय में न केवल उल्लेखनीय वृद्धि होगी, बल्कि जिले में महिला-नेतृत्व वाले विकास की एक ठोस मिसाल भी कायम होगी.
