गढ़वा में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी की माता के निधन पर शोकसभा, कर्मियों ने दी श्रद्धांजलि

गढ़वा में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ गोविंद प्रसाद सेठ की माता के निधन पर स्वास्थ्य कर्मियों ने शोकसभा आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

गढ़वा: जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ गोविंद प्रसाद सेठ की माता का गुरुवार को करीब 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके निधन की खबर से चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों में शोक की लहर दौड़ गयी. शुक्रवार को जिला यक्ष्मा केंद्र, गढ़वा में शोकसभा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला समन्वयक (यक्ष्मा) डॉ पुरुषेश्वर मिश्रा ने की. इस दौरान उपस्थित चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की.

साथ ही ईश्वर से मृतात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोकाकुल परिजनों को इस दुख की घड़ी में धैर्य और शक्ति प्रदान करने की कामना की गई.शोकसभा में झारखंड यक्ष्मा कर्मचारी संघ के राज्याध्यक्ष मुकेश कुमार ठाकुर, विश्वास शर्मा, अरविंद अग्रवाल, अजित कुमार, छोटू पाल सहित जिला यक्ष्मा केंद्र के बड़ी संख्या में चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे. सभी ने डॉ गोविंद प्रसाद सेठ के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत माता को श्रद्धांजलि अर्पित की.

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By Avinash singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

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