Garhwa News: डेंगू से व्यवसायी की मौत के बाद बढ़ी चिंता, सदर अस्पताल परिसर ही जलमग्न; 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार

गढ़वा में डेंगू का कहर, व्यवसायी की मौत से दहशत। सदर अस्पताल में 10 बेड का वार्ड तैयार, लेकिन परिसर में जलजमाव से बढ़ रही है मच्छरों की समस्या।

गढ़वा : बारिश के साथ जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है. कुछ दिन पहले सदर अस्पताल में डेंगू संक्रमित मरीज मिलने के बाद अब श्री बंशीधर नगर के युवा कपड़ा व्यवसायी अरुण जायसवाल की सोमवार को रांची में इलाज के दौरान मौत से चिंता बढ़ गयी है. हालांकि उनकी मौत डेंगू से ही हुई, इसकी चिकित्सकीय पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही होगी. लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच बीमारी की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां भी महत्वपूर्ण हो गयी हैं.

कुछ दिन पहले मेराल थाना क्षेत्र के अरंगी गांव निवासी हरि बिंद में डेंगू की पुष्टि हुई थी. वह विशाखापट्टनम में मजदूरी करता था और करीब 20 दिनों तक वहां रहने के बाद तेज बुखार से पीड़ित हुआ था. जांच में डेंगू की पुष्टि के बाद सदर अस्पताल में उसका इलाज किया गया. इधर, अरुण जायसवाल भी कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे. स्थानीय इलाज के बाद स्थिति में सुधार नहीं होने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गयी.

10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार

सिविल सर्जन डॉ जॉन एफ केनेडी ने बताया कि सदर अस्पताल में डेंगू मरीजों के लिए 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार है. फिलहाल अस्पताल में प्लेटलेट्स चढ़ाने की व्यवस्था नहीं है. उन्होंने लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने, कूलर और अन्य जलपात्रों की नियमित सफाई करने तथा ड्राई डे का पालन करने की अपील की है. तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द या शरीर पर चकत्ते होने पर तत्काल जांच कराने की सलाह दी गयी है.

डेंगू रोकने की तैयारी के बीच सदर अस्पताल ही जलमग्न

स्वास्थ्य विभाग जलजमाव रोकने और मच्छरों के प्रजनन स्थल खत्म करने पर जोर दे रहा है. लेकिन सोमवार की मूसलधार बारिश के बाद सदर अस्पताल परिसर ही जलमग्न हो गया. ऐसे में अस्पताल परिसर में पानी जमा होने से मच्छरों के पनपने का खतरा भी बढ़ गया है. डेंगू की रोकथाम के लिए घरों, दुकानों और सार्वजनिक स्थानों पर जमा पानी हटाने के साथ नियमित मच्छर नियंत्रण अभियान की जरूरत है.

सामान्य बुखार समझकर न टालें

तेज बुखार, सिरदर्द, बदन व जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, उल्टी और शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बारिश के मौसम में बुखार होने पर समय पर जांच जरूरी है. जिले से बड़ी संख्या में मजदूर दूसरे राज्यों में जाते हैं, इसलिए बाहर से लौटने वाले लोगों में लगातार बुखार की स्थिति में जांच और निगरानी पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है.

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By Avinash singh

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