गढ़वा: यदि आपका जमीन से जुड़ा कोई मामला अंचल कार्यालय में महीनों से धूल फांक रहा है या आप जाति, आय व आवासीय प्रमाण पत्र के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक चुके हैं, तो यह खबर आपके सीधे काम की है. गढ़वा समाहरणालय में समीक्षा बैठक के दौरान उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने अंचल कार्यालयों के ढीले-ढाले रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है. अद्यतन प्रतिवेदन (प्रोग्रेस रिपोर्ट) की बिंदुवार पड़ताल के दौरान जब अधिकारियों की लापरवाही और फाइलों की पेंडेंसी सामने आई, तो उपायुक्त ने अधिकारियों की जमकर क्लास ली और काम पूरा करने की समयसीमा (डेडलाइन) तय कर दी.
अब किस काम में कितने दिन लगेंगे
सामान्य दाखिल-खारिज (म्यूटेशन): -आवेदन जमा होने के 30 दिनों के भीतर हर हाल में निष्पादन अनिवार्य. आपत्ति वाले मामले:- जिन जमीनों पर कोई विवाद या आपत्ति दर्ज है, उन्हें अधिकतम 90 दिनों में सुलझाना होगा. पोर्टल पर 90 दिन से अधिक पेंडिंग मामले:- ऐसे सभी पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत क्लियर करने का सख्त निर्देश. प्रमाण पत्र व अन्य सेवाएं:- राइट टू सर्विस एक्ट के तहत जाति, आय, आवासीय और अन्य प्रमाण पत्रों को बिना देरी के तय समय पर निर्गत करना होगा.
अमीन व अधिकारियों की खिंचाई
समीक्षा के क्रम में यह बात सामने आई कि कई अंचलों में भूमि सीमांकन (डिमार्केशन) के लिए प्राप्त आवेदनों पर अमीन समय पर स्थल पर नहीं पहुंच रहे हैं. इस पर उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए हिदायत दी कि अमीन तय समय पर ही जमीन की नापी पूरी करें. वहीं, भूमि विवादों के त्वरित निबटारे के लिए सभी अंचल अधिकारियों अनुमंडल अधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों को आपसी समन्वय बनाकर त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है.
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लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज
पोर्टल पर पेंडेंसी और पुअर परफॉर्मेंस दिखाने वाले अंचल अधिकारियों को अल्टीमेटम देते हुए उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने साफ कहा कि कोई भी अधिकारी या कर्मी जानबूझकर किसी आवेदन को पेंडिंग न रखे. यदि तय समयसीमा के भीतर मामलों का निष्पादन नहीं किया गया, तो संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी.
