गढ़वा में वनकर्मियों की बर्बरता: हजात में बुजुर्ग को रातभर रखा भूखा-प्यासा, 10 हजार रुपये लेकर छोड़ा

Garhwa Crime News: गढ़वा जिले के भवनाथपुर वन क्षेत्र कार्यालय में वनकर्मियों पर 75 वर्षीय बुजुर्ग कबिलास सिंह को 12 घंटे तक बिना खाना-पानी के हाजत में बंद रखने का गंभीर आरोप लगा है. पीड़ित का कहना है कि पेयजल संकट के कारण बोरिंग कराने पर उन्हें उठाया गया और पानी मांगने पर डीजल वाली बोतल दी गई. बाद में 10 हजार रुपये की घूस देकर उन्हें छोड़ा गया. रेंजर ने जांच की बात कही है.

भवनाथपुर से विजय सिंह की रिपोर्ट

Garhwa Crime News, गढ़वा : गढ़वा के भवनाथपुर वन क्षेत्र कार्यालय में मानवता को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला प्रकाश में आया है. यहां के वनकर्मियों के लिए कुपा वन क्षेत्र में पेयजल संकट दूर करने के उद्देश्य से बोरिंग करा रहे 75 वर्षीय एक बुजुर्ग कबिलास सिंह को 12 घंटे तक हजात में रख प्रताड़ित किया गया. इस दौरान न तो उन्हें खाने के लिए कुछ दिया गया न ही इस भीषण गर्मी में पीने के लिए पानी. पीड़ित बुजुर्ग ने यह भी आरोप लगाया कि दूसरे दिन एक बिचौलिए के माध्यम से वनकर्मियों को 10 हजार रुपये की घूस देने के बाद ही उन्हें मुक्त किया गया.

पानी के लिए बोरिंग कराने पर बुजुर्ग को उठाया

मिली जानकारी के अनुसार, भवनाथपुर उत्तरी वन क्षेत्र के कुपा वन क्षेत्र में मुख्य सड़क के किनारे पिछले दो वर्षों से एक दर्जन से अधिक परिवार झोपड़ी बनाकर जीवन-यापन कर रहे हैं. ये गरीब परिवार इन दिनों इलाके में पेयजल की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. पानी की इसी किल्लत को दूर करने के लिए इन लोगों ने आपस में मिलकर एक बोरिंग कराने की योजना बनाई थी और शुक्रवार को काम शुरू कराया था. इसी बीच स्थानीय वनकर्मियों को वन भूमि पर बोरिंग होने की भनक लग गई. वनकर्मी फौरन दलबल के साथ मौके पर पहुंचे और बोरिंग का काम रुकवा दिया. इस दौरान वहां मौजूद 75 वर्षीय बुजुर्ग कबिलास सिंह को वनकर्मियों ने जबरन पकड़ लिया और अपने साथ वन क्षेत्र कार्यालय ले आए. आरोप है कि इसके बाद बुजुर्ग को पूरी रात हाजत में बगैर खाना और पानी के बंद रखा गया.

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पानी मांगने पर थमा दी डीजल वाली बोतल

पीड़ित कबिलास सिंह ने वनपाल सुनील राय सहित अन्य कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी आपबीती सुनाई. उन्होंने बताया कि शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे वन विभाग के कर्मी आए और पेयजल के लिए हो रहे बोरिंग को रोकते हुए उन्हें पकड़कर कार्यालय ले गए. बुजुर्ग के अनुसार, उन्होंने सुबह से कुछ नहीं खाया था और जब देर रात उन्हें तेज भूख-प्यास लगी, तो उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों से खाना-पानी मांगा. लेकिन कर्मियों ने खाना देने से साफ मना कर दिया और पानी मांगने पर क्रूरता की हदें पार करते हुए डीजल युक्त बोतल थमा दी, जो पीने योग्य नहीं था. शनिवार सुबह आठ बजे असना बांध निवासी अशोक यादव ने किसी तरह उन्हें खाना और पानी पहुंचाया.

कर्ज लेकर वनकर्मियों को दिए 10 हजार रुपये

कबिलास सिंह ने बताया कि हाजत में बंद रखने के दौरान वनकर्मियों द्वारा उन पर कानूनी कार्रवाई का बार-बार दबाव बनाया जा रहा था, जिसके बाद छोड़ने के एवज में सौदा तय हुआ. टाउनशिप में वनकर्मियों के लिए बिचौलिए का काम करने वाले एक परिचित के माध्यम से मामला 10 हजार रुपये में सेटल हुआ. बुजुर्ग ने कहा कि उनके पास मौके पर पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने सीघीताली गांव के पिंकू चौबे से फोन पर संपर्क कर 10 हजार रुपये कर्ज मांगे. बिचौलिए के माध्यम से जब यह रकम वनकर्मियों तक पहुंच गई, तब जाकर शनिवार सुबह करीब 11 बजे उन्हें हाजत से छोड़ा गया. उधर, टाउनशिप के संबंधित बिचौलिए ने भी यह स्वीकार किया है कि असना बांध के अशोक यादव के कहने पर उसने वनकर्मी सुनील राय से बात की थी और बुजुर्ग होने के नाते उन्हें छोड़ने की पैरवी की थी. बता दें कि कुपा वन क्षेत्र एरिया वन रक्षी राहुल सिंह तथा वनपाल सुनील राय के प्रभार में आता है.

मामले पर पक्ष-विपक्ष: बयानों में भारी अंतर्विरोध

इस पूरे मामले को लेकर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के बयानों में भारी अंतर्विरोध देखने को मिल रहा है. वनपाल सुनील राय ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मेरे खिलाफ लगे आरोप सत्य से परे हैं. वे स्वयं पिछले दो दिनों से छुट्टी पर थे और शनिवार देर शाम को ड्यूटी पर वापस लौटे हैं. वहीं, वन रक्षी राहुल सिंह से इस मामले पर उनका पक्ष जानने के लिए जब उन्हें बार-बार फोन किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा. जबकि इस वन क्षेत्र के पदाधिकारी प्रमोद कुमार ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मुझे वर्तमान में इस तरह के किसी मामले की आधिकारिक जानकारी नहीं है. यदि ऐसा कोई मामला सामने आया है या बुजुर्ग को प्रताड़ित करने की शिकायत मिलती है, तो वे इसकी उच्चस्तरीय जांच कराएंगे और देखेंगे कि सच्चाई क्या है.

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Published by: Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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