Garhwa Vidhan Sabha Result 2024: मंत्री मिथिलेश ठाकुर पिछड़े बीजेपी के सत्येंद्रनाथ तिवारी आगे

Garhwa Chunav Result 2024: गढ़वा विधानसभा सीट पर हेमंत सोरेन सरकार के मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर जीते या हारे. क्या रहा रिजल्ट. डिटेल रिपोर्ट यहां पढ़ें.

Garhwa Assembly Election Results 2024: झारखंड विधानसभा चुनाव के परिणाम में मिथिलेश ठाकुर जीत रहे हैं या हार रहे हैं, इसका अपडेट आपको सबसे पहले यहां मिलेगा. हेमंत सोरेन सरकार के मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर एक बार फिर गढ़वा विधानसभा सीट से चुनाव लड़े. गढ़वा विधानसभा सीट पर झामुमो के मिथिलेश ठाकुर और भाजपा के सत्येंद्रनाथ तिवारी के बीच कड़ा मुकाबला है. कौन जीतेगा और किसको मिलेगी हार, 23 नवंबर को मतगणना के बाद हो जाएगा फैसला.

2019 में पहली बार गढ़वा के विधायक चुने गए थे मिथिलेश ठाकुर

मिथिलेश कुमार ठाकुर वर्ष 2019 में पहली बार गढ़वा के विधायक बने थे. उन्होंने लगातार 2 बार विधायक रहे सत्येंद्र नाथ तिवारी को पराजित किया था. एक बार फिर झामुमो ने मिथिलेश ठाकुर को उम्मीदवार बनाया, तो भाजपा ने सत्येंद्र तिवारी को उतारा. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और भाजपा में रह चुके गिरिनाथ सिंह इस बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर गढ़वा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे.

गढ़वा में 68.95 प्रतिशत हुआ था मतदान

गढ़वा विधानसभा क्षेत्र में कुल 4,19,614 मतदाता थे. इसमें 2,14,962 पुरुष और 2,04,652 महिला मतदाता थे. यहां थर्ड जेंडर का कोई वोटर नहीं था. इस सीट पर 68.95 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. कुल 4,19,614 मतदाताओं में 2,89,305 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. वोट डालने वालों में 1,40,638 पुरुष और 1,48,667 महिला शामिल थीं.

11 निर्दलीय समेत 20 उम्मीदवार गढ़वा में लड़ रहे थे चुनाव

80-गढ़वा विधानसभा सीट पर 11 निर्दलीय समेत 20 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे थे. कोई महिला उम्मीदवार चुनाव के मैदान में नहीं थीं. बहुजन समाज पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन, झारखंड पार्टी, आजाद समाज पार्टी (कांशीराम), पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने अपने उम्मीदवार उतारे थे.

गढ़वा में चुनाव लड़ रहे थे 20 प्रत्याशी

क्रम सं.उम्मीदवार का नामपार्टी का नाम
1.अजय कुमार चौधरीबहुजन समाज पार्टी
2.मिथिलेश कुमार ठाकुरझारखंड मुक्ति मोर्चा
3.सत्येंद्र नाथ तिवारीभारतीय जनता पार्टी
4.गिरिनाथ सिंहसमाजवादी पार्टी
5.मो नजीबुद्दीन खानऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन
6.मंदीप मल्लाहझारखंंड पार्टी
7.लव कुमार सिंहआजाद समाज पार्टी (कांशीराम)
8.सुखलाल बाखलापीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक)
9.सोनू कुमार यादवझारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा
10.गिरिजा नंदन उरांवनिर्दलीय
11.गोरख नाथ महतोनिर्दलीय
12.दिलीप कुमार तिवारीनिर्दलीय
13.प्रमेश कुमारनिर्दलीय
14.रवींद्र कुमार सिंहनिर्दलीय
15.राम प्यारे पालनिर्दलीय
16.लोकनाथ कुमारनिर्दलीय
17.सतीश कुमार चौबेनिर्दलीय
18.सत्येंद्र तिवारीनिर्दलीय
19.सुजाउद्दीन अंसारीनिर्दलीय
20.हरीश प्रसाद सिंहनिर्दलीय
स्रोत : चुनाव आयोग (Election Commission of India)

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

संबंधित खबरें >

नगर निकाय चुनाव में नहीं चला विधानसभा का गणितगढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस व राजद को उम्मीद से कम मिले मत- अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने चौंकाया- पिछले मत प्रतिशत को बरकरार नहीं रख सके बड़े दलपीयूष तिवारी, गढ़वागढ़वा नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों और उनके जीत-हार के समीकरणों की चर्चा शहर के नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर तेज हो गयी है. बिना किसी दल और बड़े नेताओं के समर्थन के दौलत सोनी की अध्यक्ष पद पर जीत ने सभी को चौंका दिया है. इस चुनाव में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाजपा जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. लेकिन परिणामों ने इन दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. करीब 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन दलों को जो मत मिले थे, उन्हें वे अपने समर्थित प्रत्याशियों के माध्यम से बरकरार नहीं रख सके. सबसे खराब स्थिति भाजपा की रही है. विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा शहर के 33 बूथों में से 30 बूथों पर पहले स्थान पर रही थी. शहरी क्षेत्र से पार्टी को 15 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे. इसके विपरीत नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी कंचन जायसवाल को मात्र 2582 मत मिले. यदि भाजपा के बागी प्रत्याशी अलखनाथ पांडेय को मिले 2701 मत भी जोड़ दिये जाएं, तो कुल आंकड़ा लगभग 5300 तक ही पहुंचता है. यह संख्या विधानसभा चुनाव में मिले मतों की तुलना में काफी कम है.पिछले निकाय चुनाव के मत भी नहीं बचा सकी भाजपावर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में अलखनाथ पांडेय की पत्नी मीरा पांडेय ने भाजपा के टिकट पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था. उन्हें 6899 मत मिले थे. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले विनोद जायसवाल (2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पति) को 3810 मत प्राप्त हुए थे. वर्तमान चुनाव में ये दोनों ही परिवार अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके. न तो विधानसभा चुनाव में मिले मतों को बरकरार रख पाये और न ही पिछले निकाय चुनाव के आंकड़े तक पहुंच सके.झामुमो और कांग्रेस का गठजोड़ भी नहीं दिला सका जीतगढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो ने संतोष केसरी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया. दो बड़े दलों के समर्थन के बावजूद संतोष केसरी को मात्र 3790 मत प्राप्त हुए. वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने के कारण संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी अध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं. तब उन्हें 6411 मत मिले थे और वे भाजपा प्रत्याशी थीं. उसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमर सफदर को केवल 420 मत प्राप्त हुए थे. दोनों दलों को उम्मीद थी कि संयुक्त रूप से वे करीब सात हजार मत प्राप्त कर संतोष केसरी को जीत दिला देंगे. लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी.54 मतों से हारने वाली अनिता दत्ता को इस बार केवल 215 मतवर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में झामुमो की प्रत्याशी अनिता दत्ता को 6357 मत मिले थे. वे मात्र 54 मतों के अंतर से पिंकी केसरी से हार गयी थीं. इस बार अनिता दत्ता को किसी दल का समर्थन नहीं मिला और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं. लेकिन उन्हें केवल 215 मतों से ही संतोष करना पड़ा.राजद भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफलनगर परिषद चुनाव 2026 में राजद ने विकास माली को समर्थन दिया. विकास माली को 1222 मत प्राप्त हुए. जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में राजद समर्थित प्रत्याशी मनिका नारायण को 5117 मत मिले थे. वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए राजद प्रत्याशी मो शमीम को 2018 में 3728 मत प्राप्त हुए थे. कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने दलों की बजाय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी. बड़े दलों की रणनीति और पुराने मत प्रतिशत इस चुनाव में कारगर साबित नहीं हुए.

जमीन विवाद में हुई थी विक्रेता की हत्या, तीन शूटर गिरफ्तार

नाबालिग से दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में एक सप्ताह बाद भी पुलिस के हाथ खाली

फर्जी दस्तावेज पर बनवाये गये प्रमाण पत्र रद्द

यह भी पढ़ें >