गढ़वा: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने और पलायन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जिले में रोजगार सृजन का नया खाका तैयार किया गया है . प्रशासनिक आकलन के अनुसार विकसित भारत - जी राम जी योजना के तहत जिले की सभी 189 पंचायतों में औसतन 100-100 श्रमिकों को रोजगार से जोड़ा जाएगा . इस मानक के लागू होते ही गढ़वा जिले में प्रतिदिन 18,900 से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को सीधे उनके गांव में ही कार्य उपलब्ध हो सकेगा.
उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान सामग्री, प्रशासनिक मद और मजदूरी मद के बजटीय आवंटन का शत-प्रतिशत पारदर्शी निष्पादन सुनिश्चित किया जाएगा .
रोजगार व पारदर्शिता का नया समीकरण
18,900 दैनिक रोजगार का लक्ष्य: जिले की 189 पंचायतों में प्रति पंचायत 100 मजदूरों की अनिवार्यता.
100% बायोमेट्रिक सत्यापन: जॉब कार्ड धारकों का ई-केवाईसी कर बोगस मस्टर रोल पर लगेगी लगाम. 100% जियो-टैगिंग (चरण-2): निर्माण कार्यों में पारदर्शिता के लिए हर योजना की सैटेलाइट मैपिंग.
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सिंचाई कूप और भू-टैगिंग से बदलेगी ग्रामीण तस्वीर
बताया गया कि गढ़वा जिले में वित्तीय प्रगति के साथ-साथ योजनाओं के तकनीकी पक्ष को भी सुदृढ़ किया जा रहा है . बिरसा सिंचाई कूप संवर्धन मिशन के तहत स्वीकृत कुओं का निर्माण कार्य प्राथमिकता पर है, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सिंचाई सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा. इसके साथ ही 'युक्तधारा' पोर्टल के जरिए जीआईएस आधारित प्लानिंग को अनिवार्य किया गया है ताकि जल संरक्षण और भूमि विकास की योजनाएं सही स्थल पर निर्मित हों.
फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम, कार्यस्थल पर होगी रैंडम जांच
प्रशासनिक समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई है कि कागजी मस्टर रोल और धरातल की उपस्थिति में अंतर की शिकायतों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा . उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि योजनाओं की निर्माण गुणवत्ता और श्रमिकों की भौतिक उपस्थिति की औचक जांच की जाए. ई-केवाईसी पूर्ण न होने की स्थिति में संबंधित क्षेत्रों के जवाबदेह कर्मियों पर कार्रवाई तय की जाएगी.
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