प्रशासन की सख्ती के बाद पटाखा की दुकानें बंद, 20 करोड़ का कारोबार प्रभावित

प्रशासन की सख्ती के बाद पटाखा की दुकानें बंद, 20 करोड़ का कारोबार प्रभावित

गढ़वा. गढ़वा जिले में पटाखा दुकानों के खिलाफ की गयी कड़ाई के बाद पटाखे का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हो गया है. गढ़वा शहर सहित जिले के सभी प्रखंडों में अथवा ग्रामीण हाटों में होली के एक सप्ताह पूर्व से पटाखा की दुकानें सजी रहती थी वहां पटाखों की खूब बिक्री भी होती थी. लेकिन इस होली में कहीं भी पटाखे नहीं बिक रहे हैं. होली के पूर्व से ही गढ़वा शहर के रंका मोड़ सहित मेेन रोड में भी जगह-जगह अस्थायी दुकान लगाकर दर्जनों दुकानदार बम-पटाखा बेचते थे. बाद में प्रशासन ने पटाखा दुकानों को सुरक्षा को लेकर गोविंद उवि के मैदान में शिफ्ट कर दिया था. लेकिन इस साल कहीं भी पटाखों की दुकानें नहीं लगी हैं. एक अनुमान के अनुसार पटाखे का करीब 20 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हो रहा है. इससे पटाखा कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है. गढ़वा शहर में कई पटाखा कारोबारी हैं, जो सिर्फ बम-पटाखा बेंचकर लाखों की कमाई करते हैं. विशेषकर होली पर वे अपने व्यवसाय को लेकर विशेष उत्साहित रहते थे. लेकिन इस साल होली में प्रशासन की सख्ती से उनका व्यवसाय पूरी तरह से चौपट हो गया है. किसी के पास लाइसेंस नहीं : दरअसल गढ़वा के किसी भी कारोबारी के पास पटाखा बेचने के लिए लाइसेंस नहीं है. इधर पटाखा नहीं मिलने से लोग भी परेशान हैं. विशेषकर बच्चे काफी निराश हैं. होलिका दहन के पूर्व संध्या पर बाजार में काफी बेसब्री से लोग बम-पटाखा खोजते नजर आये. लेकिन उन्हें फूलझरी भी नहीं मिली. गोदरमाना की घटना के बाद सख्त हुआ है प्रशासन गौरतलब है कि गोदरमाना में गत 10 मार्च को एक पटाखा दुकान में आग लगने से तीन नाबालिग बच्चे सहित पांच लोग जिंदा जल गये थे. इसके बाद सरकार पटाखा की बिक्री के तौर-तरीकों पर पूरी तरह से सख्त हो गयी है. घटना के दिन से ही पूरे जिले में सभी जगह पटाखा बेचनेवालों के खिलाफ छापेमारी शुरू कर दी गयी है. हर दिन छापेमारी की जा रही है. साथ ही पटाखा बेचनेवालों को चेतावनी भी दी जा रही है. इसके बाद से सभी पटाखा बेचनेवालों ने अपनी दुकानों से पटाखे हटा लिये हैं. पूरे जिले में कहीं भी पटाखा नहीं बिक रहा है. रंग, अबीर व टोपी की लगी है दुकानें गढवा शहर में कहीं भी पटाखा की दुकान नहीं लगी है, लेकिन रंग-अबीर व टोपी की दुकानें हर साल की तरह सजी हैं. होली को लेकर लोग रंग, अबीर, गुलाल, पिचकारी, टोपी की जमकर खरीदारी कर रहे हैं. शहर के रंका मोड़ पर गुरुवार को खरीदारों की काफी भीड़ रही. इस संबंध में दुकानदार पवन कुमार ने बताया कि इस साल पटाखा नहीं मिलने से थोड़ी मायूसी है. 20 रु से 1100 रु तक की है पिचकारी शहर की दुकानों में 20 रु से लेकर 1100 रु तक के पिचकारी उपलब्ध हैं. इसी तरह मुखौटा 60 रु से 150 रु तक, रंग 20 रु से 60 रु तक, वाटर कलर 10 रु से 70 रु तक, पक्का रंग 30 रुपये डिब्बा, हर्बल रंग 60 रुपये का 100 ग्राम मिल रहा है. शहर के घंटा घर के पास रंका मोड़ पर काफी संख्या में दुकानें लगी थी. इसी तरह अन्य जगहों पर भी रंग-पिचकारी की दुकानें लगी हैं. लाइसेंस के पेचीदा नियमों से हो रही परेशानी : बबलू पटवा इस संबंध में गढ़वा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष बबलू पटवा ने कहा कि पटाखा बेचने के लिए लाइसेंस के नियम ज्यादा पेचीदा हैं. इस कारण गढ़वा जिले में किसी दुकानदार के पास इसका लाइसेंस नहीं है. उन्होंने कहा कि पूर्व के गढ़वा अनुमंडल पदाधिकारी से इस मामले में कुछ शिथिलता देकर संबंधित दुकानदारों को लाइसेंस दिलाने की मांग की गयी थी. लेकिन लाइसेंस नहीं मिल सका. इस कारण वैध रूप से पटाखा बेचना मुश्किल हो गया है. इससे पूरे जिले में पटाखे का 20 करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है.

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By Sanjay

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