‘हिंदी बोलने में झिझक नहीं, गर्व होना चाहिए’, गढ़वा में हिंदी दिवस पर संगोष्ठी

गढ़वा में हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में अनुराग मिंज ने कहा कि हिंदी हमारी सांस्कृतिक पहचान है, इसका प्रयोग करने में गर्व महसूस करना चाहिए।

गढ़वा. हिंदी दिवस के अवसर पर सोमवार को समाहरणालय के सभाकक्ष में संगोष्ठी आयोजित की गयी. जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज ने कहा कि हिंदी एक विशाल महासागर की तरह है, जिसमें दूसरी कई भाषाओं के शब्द सहज रूप से समाहित हैं. बदलते समय के साथ हिंदी का स्वरूप समृद्ध हुआ है और वैश्विक स्तर पर भी हिंदी के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है.

बोलचाल और लेखनी में हिंदी के प्रयोग पर जोर

अनुराग मिंज ने कहा कि हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए बोलचाल और लेखनी में इसका अधिक से अधिक प्रयोग जरूरी है. हिंदी बोलने या लिखने में किसी तरह की झिझक नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके प्रयोग पर गर्व महसूस करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता को मजबूत करने वाली भाषा है.

उन्होंने बताया कि संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था. इसी के कारण हर वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है. उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ भाषा के सही और सहज प्रयोग पर भी जोर दिया.

विरासत की तरह भाषा को भी सहेजने की जरूरत

उप निर्वाचन पदाधिकारी कुमुद झा ने कहा कि जिस तरह लोग अपनी विरासत और संस्कृति को संरक्षित रखना चाहते हैं, उसी तरह हिंदी भाषा को भी सहेजने की जरूरत है. हिंदी ने समय के साथ दूसरी भाषाओं के शब्दों को आत्मसात किया है, लेकिन इसकी मूल पहचान कायम है. उन्होंने लोगों से दैनिक जीवन में हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करने की अपील की.

कवियों ने प्रस्तुत की स्वरचित रचनाएं

संगोष्ठी में क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों, कवियों और हिंदी साहित्यकारों ने भी अपने विचार रखे. कवियों ने स्वरचित कविताएं, गीत और शेर-शायरी प्रस्तुत कर हिंदी की विशेषताओं और महत्ता को रेखांकित किया.

वरिष्ठ पत्रकार एवं हिंदी साहित्य कला मंच के अध्यक्ष विनोद पाठक ने भी हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग की अपील की. कार्यक्रम में उप निर्वाचन पदाधिकारी कुमुद झा सहित शिक्षा विभाग के पदाधिकारी, शिक्षक, विद्यार्थी, कवि और साहित

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >