केतार. विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (बीवीजी राम जी) के तहत मजदूरों को 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है, लेकिन केतार प्रखंड में योजना लागू होने के करीब ढाई महीने बाद भी इसका अपेक्षित लाभ मजदूरों को नहीं मिल पा रहा है. एक जुलाई 2026 से नयी व्यवस्था लागू होने के बाद तकनीकी अड़चनों के कारण अब तक किसी नयी योजना पर काम शुरू नहीं हो सका है. इसका असर मजदूरों के रोजगार के साथ पंचायतों में होनेवाले विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है.
9999 जॉब कार्डधारी, फिलहाल सिर्फ 107 को रोजगार
केतार प्रखंड में करीब 9999 जॉब कार्डधारी मजदूर निबंधित हैं. नयी योजनाओं का काम शुरू नहीं होने के कारण अधिकांश मजदूर रोजगार के इंतजार में हैं. विभागीय रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल पहले से संचालित वृक्षारोपण योजनाओं में ही महज 107 मजदूरों को काम मिल रहा है. हजारों जॉब कार्डधारियों वाले प्रखंड में इतनी कम संख्या में मजदूरों को रोजगार मिलने से स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.
काम नहीं मिलने के कारण मजदूरों के पलायन का सिलसिला भी बढ़ने लगा है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट गहराने लगा है. गांव में रहकर मजदूरी करनेवाली महिला श्रमिकों को भी पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है.
अंशदान और तकनीकी प्रक्रिया बनी बाधा
नयी व्यवस्था में योजनाओं के लिए 40 प्रतिशत अंशदान झारखंड सरकार की ओर से और शेष राशि केंद्र सरकार की ओर से वहन किये जाने की व्यवस्था बतायी गयी है. अंशदान से जुड़ी प्रक्रिया के अलावा तकनीकी कारणों से योजनाओं की स्वीकृति में भी परेशानी आ रही है. इसके कारण नयी योजनाओं को सैंशन कर धरातल पर काम शुरू कराने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है.
नयी योजनाएं शुरू नहीं होने से पंचायत स्तर पर ग्रामीणों की जरूरत से जुड़ी कई विकास योजनाएं भी लंबित हैं. इसका असर पंचायत और गांव के स्तर पर विकास कार्यों पर पड़ रहा है.
ग्राम सभा के बाद योजनाओं का चयन
प्रभारी प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी आनंद कुमार ने बताया कि बीवीजी राम जी योजना के तहत नाली और पक्का वर्क कराने में तकनीकी परेशानी आ रही है. नयी योजनाओं को लेकर जल्द ही ग्राम सभा करायी जायेगी. ग्राम सभा के माध्यम से टीसीबी और पंचायत की अन्य अति आवश्यक योजनाओं का चयन किया जायेगा. इसके बाद योजनाओं को प्रखंड स्तर से अनुमोदित कर कार्य शुरू कराया जायेगा.
उन्होंने बताया कि योजनाओं का काम शुरू होने के बाद जॉब कार्डधारी मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जायेगा.
नयी व्यवस्था लागू होने के ढाई महीने बाद भी पर्याप्त रोजगार नहीं मिलने से मजदूरों में निराशा है. यदि जल्द नयी योजनाओं का क्रियान्वयन शुरू नहीं हुआ, तो आनेवाले दिनों में रोजगार के लिए पलायन की समस्या और गंभीर होने की आशंका है.
