धुरकी: धान पकने से पहले हाथियों ने मचायी तबाही, 100 से 150 एकड़ फसल रौंदी

धुरकी में असमय बारिश से फसल बचाई, लेकिन हाथियों के झुंड ने 100-150 एकड़ धान, मक्का, तिल, अरहर की फसल रौंद दी. पिछले तीन सालों में पांच लोगों की मौत हो चुकी है और कई घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं.

धुरकी. असमय बारिश के कारण खेती के लिए पर्याप्त वर्षा नहीं होने के बावजूद किसानों ने मेहनत कर फसल तैयार की थी. धान की फसल तैयार होने को थी, लेकिन हाथियों के झुंड ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया. पिछले 10 दिनों से हाथियों का झुंड कनहर तटीय गांवों में सक्रिय है और दो समूहों में घूमकर फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है. गुरुवार की रात भंडार पंचायत के कदवा गांव में हाथियों ने करीब 100 से 150 एकड़ में लगी धान, मक्का, तिल व अरहर की फसल को रौंद दिया.

प्रभावित किसानों में रामप्रवेश प्रसाद गुप्ता, दयानंद प्रसाद गुप्ता, विकेश कोरवा, मंदिर सिंह, बसंत सिंह, ललन कोरवा, भिखारी शाह, अमर प्रसाद गुप्ता, अवधेश प्रसाद गुप्ता व बंसीधर गुप्ता सहित अन्य शामिल हैं.

शाम होते ही गांव में घुसने लगते हैं हाथी

ग्रामीणों के अनुसार झुंड में करीब एक दर्जन से अधिक छोटे-बड़े हाथी हैं. शाम ढलते ही हाथी गांवों में प्रवेश कर फसलों को रौंदने लगते हैं. जंगल के किनारे बसे गांवों में कई कच्चे घरों को भी हाथियों से नुकसान पहुंच चुका है. हाथियों के भय से लोग शाम होते ही घरों में दुबकने को मजबूर हैं. ग्रामीणों को फसल से अधिक अपनी जान-माल की चिंता सताने लगी है.

तीन साल में पांच लोगों की मौत का दावा

ग्रामीणों के अनुसार पिछले करीब तीन वर्षों में हाथियों के हमले में पांच लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार दर्जन से अधिक पशु मारे गये हैं और दो दर्जन से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. किसानों का कहना है कि हाथियों के डर से कई लोग खेती छोड़ने को मजबूर हैं. इसके बावजूद हाथी बस्ती में घुसकर बची हुई फसल भी नष्ट कर रहे हैं.

चार पंचायत पहले से हाथी जोन घोषित

वन विभाग ने कनहर तटीय क्षेत्र की खाला, अंबाखोरया, भंडार व खुटिया पंचायत को पहले ही हाथी जोन घोषित कर रखा है. ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद हाथियों को रोकने के लिए अब तक कोई स्थायी या प्रभावी पहल नहीं की गयी है. लगातार पांच वर्षों से फसल बर्बाद होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है.

टॉर्च व पटाखे उपलब्ध कराये गये

इधर, वनपाल प्रमोद कुमार ने बताया कि क्षेत्र में हाथियों का झुंड सक्रिय है. ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए टॉर्च व पटाखे उपलब्ध कराये गये हैं. ग्रामीणों को हाथियों को नहीं भड़काने और अनावश्यक रूप से जंगल में नहीं जाने की हिदायत दी गयी है. फसल क्षति वाले किसानों से आवेदन देने को कहा गया है. सरकारी प्रावधान के तहत मुआवजा राशि उपलब्ध करायी जायेगी.

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Avinash Singh

अविनाश कुमार सिंह प्रभात खबर के गढ़वा ब्यूरो चीफ हैं. वह आंचलिक से लेकर राज्य मुख्यालय तक 27 वर्ष से अधिक की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. राजनीतिक विश्लेषण, क्राइम रिपोर्टिंग, हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू और खोजी पत्रकारिता.में इन्हें महारत हासिल है. अविनाश कुमार सिंह झारखंड की पत्रकारिता और 'प्रभात खबर' के विश्वसनीय चेहरा हैं, जिन्होंने खबरों की गुणवत्ता को हमेशा प्राथमिकता दी है. लगभग तीन दशकों (27 वर्ष) के अपने लंबे सफर में उन्होंने पलामू ब्यूरो प्रमुख के रूप में 10 साल से अधिक समय तक नेतृत्व किया. इसके बाद प्रदेश मुख्यालय (रांची) में काम करते हुए, विशेषकर वर्ष 2024 के चुनावों के दौरान, उनके सटीक चुनावी विश्लेषण और राजनीतिक रिपोर्टिंग ने काफी प्रभाव छोड़ा.उनकी लेखनी का दायरा बेहद व्यापक है—संवेदनशील क्राइम रिपोर्टिंग से लेकर प्रमुख राजनीतिक हस्तियों के इंटरव्यू तक, उनकी हर खबर चर्चा में रही है. पत्रकारिता के माध्यम से कई बड़े मामलों का उद्भेदन करना उनकी विशेष पहचान है.झारखंड राज्य गठन के बाद अविनाश ने पलामू में काम करते हुये राजनीतिक से जुड़ी कई ऐसी खबर को ब्रेक किया ,जिसका असर राज्य की राजनीतिक पड़ा .प्रयोगधर्मी पत्रकार के रूप में भी इनकी पहचान है .संस्थान के प्रति समर्पण के लिए उन्हें 'बेस्ट एम्प्लोयी' जैसे पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है. प्रभात खबर के संघर्ष से लेकर इसके विकास और उत्थान के सफर में अविनाश एक सक्रिय सहभागी और सहयात्री रहे हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >