जिले के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना लक्ष्य, कोताही बर्दाश्त नहींः डीसी

जिले के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना लक्ष्य, कोताही बर्दाश्त नहींः डीसी

प्रतिनिधि, गढ़वा समाहरणालय स्थित सभागार में सोमवार को उपायुक्त पशुपतिनाथ मिश्रा की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग के कार्यों व विभिन्न योजनाओं की समीक्षा बैठक हुई. बैठक में कार्यों में लापरवाही बरतने, योजनाओं के खराब परफॉर्मेंस करने वाले बीपीओ, बीपीएम व पिछले तीन वर्षों में जैक व सीबीएसइ 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों के प्रभारियों से स्पष्टीकरण (शो-कॉज) मांगने का निर्देश दिया गया. उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है, इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.उपायुक्त ने सभी बीईईओ, बीपीओ और बीपीएम को नियमित रूप से विद्यालयों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया. उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे अपने अधीनस्थ सभी शिक्षा अधिकारियों व कर्मियों की दैनिक उपस्थिति प्रतिवेदन की जांच करें और उनका मासिक वेतन भी दर्ज उपस्थिति के अनुरूप जारी करें. इसके साथ ही, मिड-डे मील (पीएम पोषण योजना) की स्टीयरिंग-सह-मॉनिटरिंग कमेटी की समीक्षा के दौरान डीसी निर्देश दिया गया कि मेनू के अनुसार ही पौष्टिक आहार का वितरण हो और खाद्यान्न उठाव व ऑनलाइन डेटा एंट्री समय पर की जाये. बैठक में उप विकास आयुक्त प्रेमलता मुर्मू, जिला शिक्षा अधीक्षक अनुराग मिंज, सभी प्रखण्ड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी , बीपीओ, बीपीएम तथा शिक्षा विभाग के सहायक व कनीय अभियंता उपस्थित थे. स्कूलों में शिक्षकों की कमी की डीसी को दी जानकारी बैठक के दौरान उपायुक्त को अवगत कराया गया कि जिले के कुछ स्कूलों में शिक्षकों की घोर कमी है, जबकि कुछ स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक प्रतिनियुक्त हैं, जिससे पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है. इसपर उपायुक्त ने जिला शिक्षा अधीक्षक को निर्देश दिया कि वे जिले के विद्यालयों में शिक्षकों के तार्किक संतुलन (रैशनलाइजेशन) के लिए अविलंब प्रस्ताव तैयार कर सौंपें. निजी विद्यालय अपार आइडी बनवाने के लिए अपने छात्रों का करा रहे सरकारी विद्यालयों में नामांकन बैठक में अपार आइडी (डिजिटल पहचान) की समीक्षा के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया. जिला शिक्षा अधीक्षक ने बताया कि बिना यू-डाइस कोड वाले कुछ निजी विद्यालय अपने छात्रों की अपार आइडी बनवाने के लिए उनका नामांकन सरकारी स्कूलों में भी करवा देते हैं. छात्र पढ़ते निजी स्कूल में हैं, जिससे सरकारी स्कूलों में उपस्थिति कम दिखती है और जिले की कंपोजिट रैंकिंग खराब होती है. इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए उपायुक्त ने निर्देश दिया कि ऐसे बच्चों के अभिभावकों को अपार आइडी की महत्ता समझायी जाये. इसके बावजूद यदि बच्चे सरकारी स्कूल में नियमित उपस्थित नहीं होते हैं, तो वैसे छात्रों का नाम सरकारी विद्यालय से काटने का प्रस्ताव दें, ताकि जिले की शैक्षणिक रैंकिंग में सुधार हो सके.

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Author: Akarsh Aniket

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