प्रतिनिधि, गढ़वा कृषि विज्ञान केंद्र गढ़वा द्वारा शनिवार को टीडीसी निकरा अंगीकृत ग्राम तेनार में संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक एवं संतुलित उर्वरक प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गयी. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र के नवलेश कुमार ने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खाद और हरी खाद का संतुलित उपयोग करने से खेती की लागत कम होती है, उत्पादन बढ़ता है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है. उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया. जागरूकता कार्यक्रम में मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के उपयोग, नाइट्रोजन (यूरिया) के विभाजित प्रयोग, एनपीके के संतुलित उपयोग, उर्वरक डालते समय खेत में पर्याप्त नमी बनाये रखने और जड़ों के पास उर्वरक देने की तकनीक पर विस्तार से चर्चा की गयी. साथ ही सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए पर्णीय छिड़काव, खरपतवार नियंत्रण और जैव उर्वरकों के उपयोग की जानकारी भी दी गयी. किसानों को गोबर खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद (ढैंचा और सनई), जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक इनपुट के उपयोग के लाभ बताये गये. फसल अवशेषों के पुनः उपयोग और मल्चिंग को भी बढ़ावा देने पर जोर दिया गया. कार्यक्रम में 82 किसानों ने लिया भाग जागरूकता कार्यक्रम में कुल 82 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 49 महिला किसान और 33 पुरुष किसान शामिल थे. स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही. इस अवसर पर अमोला देवी, अशोक राम, शिव शंकर राम सहित अन्य ग्रामीण और किसान उपस्थित थे. कार्यक्रम के अंत में किसानों ने संतुलित उर्वरक उपयोग और प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने का संकल्प लिया.
संतुलित उर्वरक उपयोग से खेती की लागत घटेगी, बढ़ेगा किसानों का मुनाफा : नवलेश कुमार
संतुलित उर्वरक उपयोग से खेती की लागत घटेगी, बढ़ेगा किसानों का मुनाफा : नवलेश कुमार
