जमीन विवाद में हुई थी विक्रेता की हत्या, तीन शूटर गिरफ्तार

भंडरिया में सब्जी विक्रेता हत्याकांड का पुलिस ने किया खुलासा

भंडरिया में सब्जी विक्रेता हत्याकांड का पुलिस ने किया खुलासा प्रतिनिधि, भंडरिया भंडरिया थाना क्षेत्र के बिजका साप्ताहिक बाजार में 25 फरवरी की शाम सब्जी दुकानदार दीपक चौधरी की गोली मारकर हत्या मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है. पुलिस ने तीन शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है. जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह हत्या पुराने भूमि विवाद को लेकर की गयी थी. मृतक के भाई राकेश चौधरी के आवेदन पर भंडरिया थाना केस दर्ज कर पुलिस ने त्वरित अनुसंधान शुरू किया. जांच के दौरान सामने आया कि विवादित जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था. इसी रंजिश में आरोपी सूर्यदेव चौधरी ने एक लाख रुपये की सुपारी देकर शूटरों से दीपक चौधरी की हत्या करायी. पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद शूटरों को 20 हजार रुपये मोबाइल के माध्यम से भी भेजे गये थे. 25 फरवरी 2026 को बिजका साप्ताहिक बाजार में भारी भीड़ का फायदा उठाते हुए अपराधियों ने दीपक चौधरी पर पीछे से ताबड़तोड़ गोलियां चलायीं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गयी थी. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गयी थी. तकनीकी साक्ष्य और छापेमारी से मिली सफलता अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रोहित रंजन सिंह ने बताया कि हत्या पूरी तरह साजिश के तहत की गयी थी. तकनीकी साक्ष्य, गुप्त सूचना और लगातार छापेमारी के आधार पर तीनों शूटरों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार आरोपियों में बिंदा गांव निवासी विजय सिंह (38), पिता श्याम नारायण सिंह, जेटू सिंह (35), पिता मंथन सिंह तथा फकीराडीह गांव निवासी बजरंगी चौधरी (33), पिता सरजू चौधरी शामिल हैं. पुलिस ने आरोपियों के पास से हत्या में प्रयुक्त देसी कट्टा, कारतूस, चार मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गयी दो मोटरसाइकिलें बरामद की हैं. मुख्य साजिशकर्ता की तलाश जारी एसडीपीओ ने बताया कि मुख्य साजिशकर्ता सूर्यदेव चौधरी समेत अन्य संलिप्त आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है. जल्द ही सभी आरोपियों को कानून के शिकंजे में लिया जायेगा. पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित विशेष छापेमारी दल ने इस हत्याकांड का सफल उद्भेदन किया. छापेमारी दल में थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर सुभाष कुमार पासवान, पुलिस अवर निरीक्षक दिलीप कुमार रंजन, किशोर कुमार समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

नगर निकाय चुनाव में नहीं चला विधानसभा का गणितगढ़वा नगर परिषद चुनाव में भाजपा, झामुमो, कांग्रेस व राजद को उम्मीद से कम मिले मत- अध्यक्ष पद पर निर्दलीय प्रत्याशी की जीत ने चौंकाया- पिछले मत प्रतिशत को बरकरार नहीं रख सके बड़े दलपीयूष तिवारी, गढ़वागढ़वा नगर परिषद चुनाव संपन्न होने के बाद प्रत्याशियों को मिले मतों और उनके जीत-हार के समीकरणों की चर्चा शहर के नुक्कड़ों और चौक-चौराहों पर तेज हो गयी है. बिना किसी दल और बड़े नेताओं के समर्थन के दौलत सोनी की अध्यक्ष पद पर जीत ने सभी को चौंका दिया है. इस चुनाव में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाजपा जैसे बड़े दलों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी थी. लेकिन परिणामों ने इन दलों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. करीब 15 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में इन दलों को जो मत मिले थे, उन्हें वे अपने समर्थित प्रत्याशियों के माध्यम से बरकरार नहीं रख सके. सबसे खराब स्थिति भाजपा की रही है. विधानसभा चुनाव 2024 में भाजपा शहर के 33 बूथों में से 30 बूथों पर पहले स्थान पर रही थी. शहरी क्षेत्र से पार्टी को 15 हजार से अधिक मत प्राप्त हुए थे. इसके विपरीत नगर निकाय चुनाव में भाजपा के अध्यक्ष पद की प्रत्याशी कंचन जायसवाल को मात्र 2582 मत मिले. यदि भाजपा के बागी प्रत्याशी अलखनाथ पांडेय को मिले 2701 मत भी जोड़ दिये जाएं, तो कुल आंकड़ा लगभग 5300 तक ही पहुंचता है. यह संख्या विधानसभा चुनाव में मिले मतों की तुलना में काफी कम है.पिछले निकाय चुनाव के मत भी नहीं बचा सकी भाजपावर्ष 2018 के नगर निकाय चुनाव में अलखनाथ पांडेय की पत्नी मीरा पांडेय ने भाजपा के टिकट पर उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा था. उन्हें 6899 मत मिले थे. वहीं निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उपाध्यक्ष पद पर चुनाव लड़ने वाले विनोद जायसवाल (2026 में भाजपा समर्थित प्रत्याशी कंचन जायसवाल के पति) को 3810 मत प्राप्त हुए थे. वर्तमान चुनाव में ये दोनों ही परिवार अपने पुराने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके. न तो विधानसभा चुनाव में मिले मतों को बरकरार रख पाये और न ही पिछले निकाय चुनाव के आंकड़े तक पहुंच सके.झामुमो और कांग्रेस का गठजोड़ भी नहीं दिला सका जीतगढ़वा नगर परिषद चुनाव में झामुमो ने संतोष केसरी को अपना समर्थित प्रत्याशी बनाया था. कांग्रेस ने भी उन्हें समर्थन दिया. दो बड़े दलों के समर्थन के बावजूद संतोष केसरी को मात्र 3790 मत प्राप्त हुए. वर्ष 2018 के निकाय चुनाव में महिला आरक्षित सीट होने के कारण संतोष केसरी की पत्नी पिंकी केसरी अध्यक्ष पद की प्रत्याशी थीं. तब उन्हें 6411 मत मिले थे और वे भाजपा प्रत्याशी थीं. उसी चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमर सफदर को केवल 420 मत प्राप्त हुए थे. दोनों दलों को उम्मीद थी कि संयुक्त रूप से वे करीब सात हजार मत प्राप्त कर संतोष केसरी को जीत दिला देंगे. लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी.54 मतों से हारने वाली अनिता दत्ता को इस बार केवल 215 मतवर्ष 2018 के नगर परिषद चुनाव में झामुमो की प्रत्याशी अनिता दत्ता को 6357 मत मिले थे. वे मात्र 54 मतों के अंतर से पिंकी केसरी से हार गयी थीं. इस बार अनिता दत्ता को किसी दल का समर्थन नहीं मिला और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं. लेकिन उन्हें केवल 215 मतों से ही संतोष करना पड़ा.राजद भी पिछला प्रदर्शन दोहराने में विफलनगर परिषद चुनाव 2026 में राजद ने विकास माली को समर्थन दिया. विकास माली को 1222 मत प्राप्त हुए. जबकि वर्ष 2018 के चुनाव में राजद समर्थित प्रत्याशी मनिका नारायण को 5117 मत मिले थे. वहीं उपाध्यक्ष पद के लिए राजद प्रत्याशी मो शमीम को 2018 में 3728 मत प्राप्त हुए थे. कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार मतदाताओं ने दलों की बजाय प्रत्याशियों को प्राथमिकता दी. बड़े दलों की रणनीति और पुराने मत प्रतिशत इस चुनाव में कारगर साबित नहीं हुए.

नाबालिग से दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में एक सप्ताह बाद भी पुलिस के हाथ खाली

फर्जी दस्तावेज पर बनवाये गये प्रमाण पत्र रद्द

ट्रैक साइकिलिंग में जिले आमिर ने जीते तीन स्वर्ण पदक

यह भी पढ़ें >