76.5 हजार मतदाता करेंगे प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला

जिले के तीनों निकायों में 255 प्रत्याशी मैदान में, महिला मतदाताओं की भूमिका रहेगी निर्णायक

जिले के तीनों निकायों में 255 प्रत्याशी मैदान में, महिला मतदाताओं की भूमिका रहेगी निर्णायक जितेंद्र सिंह, गढ़वा नगर निकाय चुनाव में इस बार कुल 76,559 मतदाता जिले के तीनों निकाय के विभिन्न पदों के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं. ये मतदाता चुनाव मैदान में उतरे 255 प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे. चुनाव को लेकर तीनों शहरी निकायों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गयी हैं. सभी प्रत्याशी मतदाताओं, खासकर महिला मतदाताओं को साधने में जुटे हैं. जिले के तीनों नगर निकायों, गढ़वा नगर परिषद, श्री वंशीधर नगर नगर पंचायत और मझिआंव नगर पंचायत में कुल 76, 559 मतदाता हैं. इनमें 37,483 महिला और 39,076 पुरुष मतदाता शामिल हैं. चुनावी माहौल के बीच आधी आबादी का रुझान प्रत्याशियों की जीत और हार तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है. गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में कुल 34,347 मतदाता हैं. इनमें 17, 570 पुरुष और 16,777 महिला मतदाता शामिल हैं. श्री बंशीधर नगर नगर पंचायत क्षेत्र में कुल 28,331 मतदाता हैं. इनमें 13,749 पुरुष और 13,119 महिला मतदाता शामिल हैं. वहीं मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र में कुल 15,266 मतदाता हैं. यहां 7, 757 पुरुष और 7,509 महिला मतदाता शामिल हैं. जिला प्रशासन से प्राप्त वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार तीनों निकायों की कुल जनसंख्या 97,133 है. इसमें अनुसूचित जाति के 16,246, अनुसूचित जनजाति के 3,835, अत्यंत पिछड़ा वर्ग एक के 35,518, पिछड़ा वर्ग दो के 21,554 और सामान्य वर्ग के 19,980 लोग शामिल हैं. वर्तमान समय में इन आंकड़ों में वृद्धि होने की संभावना है. गढ़वा नगर परिषद क्षेत्र में अनुसूचित जाति की आबादी 5,740, अनुसूचित जनजाति 1, 204, अत्यंत पिछड़ा वर्ग एक 15, 479, पिछड़ा वर्ग दो 13,787 और सामान्य वर्ग की आबादी 9,849 है. श्री वंशीधर नगर नगर पंचायत में अनुसूचित जाति 2,614, अनुसूचित जनजाति 1,577, अत्यंत पिछड़ा वर्ग एक 11,577, पिछड़ा वर्ग दो 6, 59 और सामान्य वर्ग 6,162 हैं. मझिआंव नगर पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति 4,193, अनुसूचित जनजाति 17 हजार, अत्यंत पिछड़ा वर्ग एक 8,462, पिछड़ा वर्ग दो 1, 708 और सामान्य वर्ग की आबादी 3,939 हैं. आधी आबादी पर प्रत्याशियों की नजर इस बार चुनाव में महिला मतदाताओं की संख्या निर्णायक मानी जा रही है. यहीं कारण है कि सभी प्रत्याशी घर-घर संपर्क अभियान के दौरान महिला सशक्तीकरण, स्वरोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं. कई प्रत्याशी महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों, रोजगार और कौशल विकास से जोड़ने के वादे कर रहे हैं. ओबीसी आरक्षण से बदला चुनावी समीकरण इस बार नगर निकाय चुनाव पिछड़ा वर्ग आरक्षण के साथ कराया जा रहा है. इससे पहले हुए त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण लागू नहीं था, जिसके कारण असंतोष देखा गया था. न्यायालय के निर्देश के बाद इस बार ओबीसी आरक्षण लागू होने से चुनावी समीकरण बदल गये हैं. राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों ने जातीय आधार पर अपनी रणनीति तैयार की है. कई सीटों पर नये सामाजिक समीकरण बनते दिख रहे हैं.

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By Akarsh Aniket

Akarsh Aniket is a contributor at Prabhat Khabar.

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