जामकर्ता रंका थाना प्रभारी चिंतामणि रजक व एएसआइ सोहन को निलंबित करने व मृतक के आश्रितों को सरकारी नौकरी व मुआवजे को लेकर कर रहे थे नारेबाजी
गढ़वा : रंका थाना के बरवाहा से 227 भेड़ों के साथ रविवार को अगवा किये गये दोनों सगे भाइयों की हत्या कर दी गयी. बुधवार को पीपरटांड़ जंगल से दोनों भाइयों का शव बरामद किया गया. मृतकों में अनिल पाल (50 वर्ष) व विजय पाल (45 वर्ष) बताया गया. दोनों गढ़वा थाना के सोह गांव के रहनेवाले थे.
जब वे अपने भेड़ों को लेकर बरवाहा में पड़ाव बनाकर थे, उसी समय दोनों को उनके भेड़ों सहित अगवा किया गया था. शव को देखने से पता चलता है कि दोनों भाइयों की गला रेतकर हत्या की गयी है. इसके सदमे में मृतकों की मां का भी निधन हो गया. शव बरामद होने की खबर मिलते ही सोह गांव सहित आसपास गांवों के लोग आक्रोशित हो गये और इसके विरोध में गढ़वा-अंबिकापुर एनएच 343 मार्ग को जाम कर दिया.
इस कारण चार घंटे तक छत्तीसगढ़ और झारखंड की ओर से आनेजानेवाले वाहनों का लंबा जाम लग गया. जामकर्ता घटना में लापरवाही के लिए रंका के एएसआइ सोहन कुमार व थाना प्रभारी चिंतामणि रजक को निलंबित करने, मृतक के आश्रित को 10 -10 लाख मुआवजा एवं एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे थे.
बाद में गढ़वा एसडीपीओ वहामन टुडु, रंका एसडीपीओ मनोज कुमार, रंका बीडीओ व गढ़वा बीडीओ के संयुक्त आश्वासन पर दोपहर 12 बजे जाम समाप्त हुआ. एसडीपीओ ने बताया कि नामजद आरोपी ढेंगुरा गांव निवासी उमेश यादव, लालजी यादव, राजेश यादव व विष्णु यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है. उन्होंने 24 घंटे के अंदर सभी आरोपियों की गिरफ्तार कर लेने का आश्वासन दिया.
थाना प्रभारी चार में से एक आरोपी के पक्ष में थे : परिजन
जामस्थल पर परिजनों ने बताया कि दोनों के गायब होने के बाद उनलोगों ने चार लोगों उमेश यादव, शिवपूजन यादव,राजेश यादव एवं लालजी यादव को नामजद आरोपी बनाते हुए प्राथमिकी के लिए आवेदन दिया, तो थाना प्रभारी ने कहा कि उमेश यादव अपना आदमी है उसका नाम हटा दो, जब वे लोग नहीं माने तो एएसआइ सोहन कुमार ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया.
