संदीप कुमार, केतार : केतार प्रखंड में झारखंड सरकार द्वारा विधवा महिलाओं के लिए चलायी जा रही महत्वाकांक्षी योजना भीमराव अांबेडकर आवास योजना का लाभ प्रशासनिक उदासीनता के कारण प्रखंड की विधवा महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है . इसके कारण विधवा महिलाएं सरकार की कोशिश के बावजूद टूटे हुए मिट्टी के घरों में रहने को मजबूर हैं.
प्रखंड के मुकुंदपुर गांव निवासी पूनम कुंअर के पति संतोष वर्मा का देहांत दो वर्ष पूर्व टीवी से हो गया था़ उस समय से विधवा पूनम पति द्वारा बनाये गये टूटे हुए मिट्टी के घर में रहने को मजबूर है. पूनम ने बताया कि उसने कमाई का सारा पैसा पति संतोष वर्मा के इलाज में खर्च हो गया. पति की मृत्यु के बाद वह किसी तरह मजदूरी करके अपने और तीन बच्चों का भरण-पोषण कर रही है़
पैसा नहीं रहने के कारण वह अपने पुराने खपरैल घर का समय पर मरम्मत नहीं करा पाती है. इससे बरसात के दिनों में खपरैल घर से पानी टपकते रहता है. पूनम ने कहा कि उसने आवास की मांग को लेकर मुकुंदपुर पंचायत के मुखिया संगीता देवी से कई बार गुहार लगायी. इसके बावजूद भी उसे आवास नहीं मिला . उसने कहा कि उसके अलावे उसके घर में और कोई नहीं है, जो प्रखंड कार्यालयों में दौड़ भाग कर सके.
इसके कारण उसे आवास नहीं मिल रहा है. विदित हो कि रघुवर सरकार ने 14 अप्रैल 2016 को ऐसी ही विधवा महिलाओं के लिये भीमराव अांबेडकर योजना की शुरुआत की है. ताकि विधवा महिलाओं को वृद्धाश्रम का रुख न करना पड़े .इसके बावजूद सरकारी पदाधिकारियों की बेरुखी से इसका लाभ पूनम जैसी विधवा महिलाओं को नहीं मिल पा रहा है.
