गढ़वा : हिंदी दिवस के अवसर पर ब्राइट फ्यूचर स्कूल में एक सेमिनार का आयोजन किया गया. सेमिनार का उद्घाटन विद्यालय के निदेशक अशोक विश्वकर्मा ने किया. इस अवसर पर बच्चों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी जन-जन की भाषा है. इसमें ऊंच-नीच का कोई भेदभाव नहीं है. क्योंकि इसमें ना कोई स्माल लेटर होते हैं और न कोई कैपिटल लेटर होते हैं.
उन्होंने कहा कि सभी अक्षर बराबर होते हैं. हिंदी भाषी सबसे समानता का व्यवहार और बर्ताव करते हैं. हिंदी दुनिया में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, लेकिन दुर्भाग्य है कि आज लेखकों और कवियों की संख्या घटती जा रही है. दुनिया के अन्य देश अपने भाषा से आज विकास के मुकाम पर हैं और भारत अंग्रेजों की भाषा अंग्रेजी की बदौलत आगे बढ़ना चाहता है, यह एक विडंबना है.
निदेशक ने कहा कि हमें अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए और अधिक से अधिक अपने भाषा का प्रयोग करना चाहिए. अन्य भाषा सीखना कोई अपराध नहीं है, पर दूसरे भाषा पर निर्भर रहना गलत है. हिंदी हमारी मातृभाषा है और हमें इस पर गर्व होना चाहिए. इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य सुनीता विश्वकर्मा ने कहा कि वास्तव में हिंदी दुनिया की अद्वितीय भाषा है जो सबसे अधिक बोली और समझी जाती है.
फिर भी हमें हिंदी दिवस मनाना पड़ता है और यह समझाना पड़ता है कि हिंदी भी कोई एक भाषा है, यह एक गलत अवधारणा है . इस अवसर पर विद्यालय के कई शिक्षकों ने अपने विचार व्यक्त किये. इस कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षकों में मधुबाला पाठक, सुनीता पटेल, मधुबाला शर्मा, पूनम शर्मा, इरफान अली, इरशाद आलम, मयंक विश्वकर्मा, काजल सिंह, खुशबू विश्वकर्मा, अनुपम कुमारी, शालिनी विश्वकर्मा, सलमा खातून, आकिब इकबाल, उपस्थित थे.
