गढ़वा : गढ़वा व्यवहार न्यायालय के अधिवक्ता आशीष दुबे की पुलिस द्वारा की गयी पिटाई को लेकर यहां अधिवक्ताओं की कलमबंद हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही. इसके कारण व्यवहार न्यायालय में शनिवार को भी किसी भी मामले की सुनवाई नहीं हो सकी. अपने घोषित मांग पत्रों को लेकर गढ़वा बार एसोसिएशन के सभी अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार को जारी रखते हुए जिला अधिवक्ता संघ भवन में बैठक की. इस बैठक में झारखंड स्टेट बार कौंसिल के नवनिर्वाचित सदस्य राम सुभग सिंह व रिंकू भगत भी उपस्थित थीं.
दोनों वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने आशीष दुबे के साथ घटित घटना की कड़े शब्दों में निंदा की. बैठक में अधिवक्ता आशीष दुबे की ओर से न्यायालय में परिवाद पत्र दाखिल करने का निर्णय लिया गया. राम सुभग सिंह ने कहा कि झारखंड उच्च न्यायालय में दाखिल पीआइएल पर आठ मई को सुनवाई होनी है. उन्होंने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाये, कम होगी. इसमें एसपी मो अर्शी, उनके अंगरक्षक सहित जो भी पुलिस पदाधिकारी दोषी हैं, सब पर कार्रवाई होनी चाहिए. बैठक में निर्णय लिया गया कि जब तक न्याय नहीं मिलता है, उनका आंदोलन जारी रहेगा.
उनकी मांगों में गढ़वा एसपी पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई करने, एसपी को गढ़वा से स्थानांतरित करने, घटना की जांच स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराने की बात शामिल है. बैठक में आशीष दुबे का रिम्स में चल रहे इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया. इसको लेकर रिम्स के प्रबंधक से मिलने की बात कही गयी. इसके पूर्व झारखंड स्टेट बार काउंसिल के लिए निर्वाचित होने के बाद पहली बार गढ़वा पहुंचने पर राम सुभग सिंह व रिंकू भगत को जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अलख निरंजन चौबे ने गढ़वा बार एसोसिएशन की ओर से स्वागत किया.
इस मौके पर अधिवक्ता प्रमोद कुमार, विजय पांडेय, हरिनारायण धरदुबे, ललित पांडेय, ओम प्रकाश चौबे, राघवेंद्र शुक्ला, परेश तिवारी, अरविंद पांडेय, मुकेश तिवारी, प्रेमचंद तिवारी, संजीव पांडेय, पंचम सिंह सहित काफी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे.
