East Singhbhum News : गुड़ाबांदा प्रखंड के नौ अस्पतालों के भवन चकाचक, पर इलाज के लिए डॉक्टर नहीं

60 हजार की आबादी का इलाज भगवान भरोसे, एक एंबुलेंस तक नहीं

गुड़ाबांदा . गुड़ाबांदा प्रखंड में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के नौ भवन बनाये गये हैं. उक्त अस्पताल भवन बाहर से आकर्षक दिखते हैं, पर अंदर जाने पर कोई व्यवस्था नहीं मिलती है. अस्पताल के लिए सबसे जरूरी चिकित्सक होते हैं. पर यहां डॉक्टर ही नहीं हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं है कि अस्पताल भवन बना देने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधा कैसे मिलेगी? किसी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक पदस्थापित नहीं है. कई स्वास्थ्य केंद्र झाड़ियों से घिर गये हैं.

प्रखंड में दो-दो विधायक, लेकिन दो दशक के स्वास्थ्य सेवा बेपटरी :

गुड़ाबांदा प्रखंड में दो-दो विधानसभा क्षेत्र घाटशिला और बहरागोड़ा आता है. दो-दो विधायक होने के बावजूद प्रखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था कई दशक से बेपटरी है. गुड़ाबांदा प्रखंड बना, तो उम्मीद जगी थी. यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनेगा. हालांकि, वह नहीं हुआ. प्रखंड बन गया, पर आज भी पीएचसी के भरोसे गुड़ाबांदा की स्वास्थ्य व्यवस्था है.

एएनएम और स्वास्थ्य सहिया के भरोसे 60 हजार आबादी :

घाटशिला विस के अधीन प्रखंड की चार पंचायतें आती हैं. वहां तीन सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) और सात एएनएम पदस्थापित हैं. वहीं, बहरागोड़ा विस के अधीन जो चार पंचायतें आती हैं, उसमें सिर्फ एक सीएचओ व तीन एएनएम पदस्थापित हैं. एएनएम और स्वास्थ्य सहिया के भरोसे प्रखंड की 60 हजार आबादी की जिंदगी गुजर रही है.

कल्याण अस्पताल का भवन जर्जर, हादसे का खतरा :

प्रखंड में विकास भारती बिशुनपुर संस्था से संचालित कल्याण अस्पताल है. यहां इन दिनों इलाज हो रहा है, लेकिन भवन जर्जर है. लोग जान जोखिम में डाल कर इलाज कराने आते हैं. गुड़ाबांदा प्रखंड बनने के बाद स्वास्थ्य भवन बनना शुरू हो गया था. प्रखंड बने 15 साल बीत गये, लेकिन डॉक्टर नहीं मिला. इधर गरीब व असहाय लोग इलाज के अभाव से जान गंवा रहे हैं.

एंबुलेंस भी नहीं, निजी वाहन के सहारे मरीज :

प्रखंड में पहले एक एंबुलेंस थी. अब वो भी नहीं है. लोग निजी गाड़ी भाड़ा कर या खटिया के सहारे अस्पताल पहुंचते हैं. लोगो को निजी खर्च में स्वास्थ्य लाभ के लिए ओडिशा के बारिपदा और बंगाल के झाड़ग्राम जाना पड़ता है. निजी क्लीनिक जाकर इलाज कराते हैं. सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था प्रखंड में बदहाल है. इसे देखने और सुनने वाला कोई नहीं है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By ATUL PATHAK

ATUL PATHAK is a contributor at Prabhat Khabar.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >