गालूडीह .
प्रशासन व जनप्रतिनिधियों से टुसू पर्व पर नदी घाटों की सफाई व विकास पर ध्यान देने की मांग की है. गालूडीह टुसू पर्व मेला कमेटी के सदस्यों का कहना है कि करीब दो साल से मकर संक्रांति के दिन 14 जनवरी को टुसू मेला लगता है. सुवर्णरेखा नदी के दिगड़ी घाट में सुबह में लोग जुटते हैं. नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं. गरीबों को दान-पुण्य करते हैं. सुवर्णरेखा नदी का दिगड़ी घाट बदहाल है. रास्ता जंगल-झाड़ियों से भरा है. घाट की हालत में चिंताजनक है.दिगड़ी घाट की स्थिति भी चिंताजनक
नदी तट पर स्थित भैरव धान दिगड़ी घाट की स्थिति भी चिंताजनक है. यहां मकर संक्रांति के दिन भीड़ उमड़ती है. यहां आदिवासी जुमित गांवता क्लब की ओर से भव्य टुसू मेला का आयोजन किया जाता है. घाट पर जगह-जगह कचरे का ढेर, झाड़ियां और घाट पर उतरने वाले रास्ते पर गड्ढे बने हैं. लोगों के लिए घाट पर सुरक्षित उतरना कठिन हो गया है. नदी घाट जाने वाले सड़क किनारों पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां और घास उग आयी हैं. रास्ता जर्जर हो चुका है. मकर संक्रांति से पहले झाड़ियों की साफ सफाई करने की आवश्यकता है.विधायक निधि से बन रहा तुपुनाय घाट
तत्कालीन विधायक रामदास सोरेन ने 27 जुलाई, 2025 को घाटशिला माझी परगना महाल में समारोह आयोजित कर कई योजनाओं का ऑनलाइन शिलान्यास किया था. इसमें गालूडीह में सुवर्णरेखा नदी किनारे दिगड़ी घाट में आदिवासी समाज के लिए तुपुनाय घाट और शेड का निर्माण शामिल था. इसका निर्माण फिलहाल चल रहा है. यहां आदिवासी समाज किसी के निधन पर क्रिया कर्म करता है. अस्थि विसर्जन करते हैं. समाज का यह पवित्र स्थल माना जाता है.
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