पश्चिमी सिंहभूम के इस प्रखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल, पेड़ के नीचे मरीजों का इलाज

कहने को तो पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाने के लिये हर साल लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन कार्य के प्रति इच्छा शक्ति के अभाव में मरीजों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है

कहने को तो पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाने के लिये हर साल लाखों रुपये खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन कार्य के प्रति इच्छा शक्ति के अभाव में मरीजों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है. स्थिति यह है कि टोंटो प्रखंड के सीएचसी का ओपीडी पिछले करीब एक साल से बंद है. ऐसे मरीजों को पेड़ के नीचे अपना इलाज कराना पड़ रहा है.

बुधवार को भी झींकपानी के दिलीप साव के पांव में जख्म होने के कारण उसे पिछले करीब 4-5 हफ्ते से पांव का ड्रेसिंग कराने लेकर आना पड़ रहा है, लेकिन ओपीडी कक्ष बंद रहने के कारण उसे पेड़ के नीचे ड्रेसिंग कराना पड़ा. उसने बताया कि बारिश के समय पेड़ के नीचे भी ड्रेसिंग व इंजेक्शन देने का काम नहीं हो पाता है. ऐसे में मरीजों को अन्यत्र जाना पड़ता है.

पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ बलराम मांझी ने कहा कि यह सीएचसी चार कमरों में चल रहा है. जिले में सबसे ज्यादा ओपीडी मैं ही करता हूं. भवन की स्थिति दयनीय है. ड्रेसिंग रूम नहीं है. फिर भी ड्रेसिंग का काम किया जाता है.

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By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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