मुसाबनी प्रखंड के कुमीरमुड़ी गांव में रविवार को 12 मौजा के ग्राम प्रधानों की नीतिगत बैठक आयोजित की गयी. 12 मौजा के ग्राम प्रधान मेघराय सोरेन की अध्यक्षता में बैठक हुई. इस बैठक में विभिन्न गांवों के प्रधान, माझी परगना महाल के पदाधिकारी, ग्रामीण और पारंपरिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के प्रबुद्ध प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. बैठक का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक व्यवस्था को अक्षुण्ण रखना और ग्रामीणों को उनके संवैधानिक अधिकारों के प्रति सचेत करना था.मौके पर मुख्य वक्ता देश परगना के प्रतिनिधि सह देश जोगो गोडेत जगदीश बास्के ने कहा कि पूर्वी सिंहभूम जिला भारतीय संविधान के तहत एक पूर्णतः ''''अनुसूचित क्षेत्र'''' घोषित है. इस क्षेत्र में संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ग्रामसभा को विशेष और अत्यंत महत्वपूर्ण शक्तियां प्राप्त हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि गांव की सीमा के भीतर सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय केवल और केवल ग्रामसभा के माध्यम से ही लिए जाने चाहिए, क्योंकि यही सबसे सशक्त लोकतांत्रिक इकाई है.
किसी संगठन के बहकावे में नहीं आने की अपील, एकजुटता पर बलश्री बास्के ने बैठक में मौजूद ग्रामीणों से कहा कि वे बाहरी तत्वों या किसी भी प्रकार के गैर-पारंपरिक संगठन के बहकावे में बिल्कुल न आयें. उन्होंने कहा कि अपने गांव के वास्तविक विकास, आपसी सामाजिक एकता को अक्षुण्ण रखने तथा सदियों पुरानी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को और अधिक जीवंत व मजबूत बनाने के लिए ग्रामसभा की गरिमा को सर्वोपरि मानना अनिवार्य है. इसके साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति भी सदैव जागरूक रहने का आह्वान किया. बैठक के दौरान रुआम के मांझी बाबा बलराम माडी और चापड़ी के हिमांशु सोरेन समेत कई अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार साझा किए. मौके पर केंदाडीह के प्रफुल्ल सोरेन, हरे कृष्णा मुर्मू, गोपाल सोरेन, चाकुलिया के सूर्य माझी, सुभाष टुडू, मंगल सिंह सोरेन के अलावे काशीडीह, पाटकीता, सोमायडीह, सोहदा, बेनासोल, कुलामाडा, माटीगोड़ा समेत 12 मौजा के कई गांवों एवं टोलो के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे.
