प्रखंड कार्यालय के क्वार्टर में घुसा हाथी, एसएफसी गोदाम का दरवाजा तोड़ा, दहशत

चाकुलिया : सीसीटीवी में कैद हुआ नजारा

चाकुलिया.

चाकुलिया प्रखंड कार्यालय व क्वार्टर परिसर में सोमवार की रात एक विशालकाय जंगली हाथी के पहुंचने से अफरा-तफरी मच गयी. गजराज ने सबसे पहले एसएफसी गोदाम के बाउंड्री के मुख्य दरवाजे को तोड़ दिया. हाथी प्रखंड कर्मियों के क्वार्टर के इर्द-गिर्द काफी देर तक चक्कर काटता रहा. हाथी के भारी कदमों की आहट और चिंघाड़ सुनकर क्वार्टर में सो रहे कर्मियों की नींद उड़ गयी. वे डर के मारे दुबक गये. हाथी की पूरी हलचल वहां लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है.

बाल-बाल बचा रात्रि प्रहरी ‘बहादुर’

लगभग एक घंटा तक हाथी प्रखंड कार्यालय परिसर में उत्पात मचाता रहा. इसी बीच एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. चाकुलिया नगर पंचायत क्षेत्र में पिछले कई वर्षों से नेपाल से आया ‘बहादुर’ नामक रात्रि प्रहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालता है. वह रातभर सीटी बजाकर लोगों को मुस्तैद रखता है.

प्रखंड कर्मी रंजीत भटनागर ने बताया कि जब जंगली हाथी क्वार्टर के पास तबाही मचा रहा था, तब बहादुर वहां से महज 200 मीटर की दूरी पर सीटी बजाते हुए उसी दिशा में आ रहा था. स्थिति इतनी भयावह थी कि हाथी के डर से कोई भी कर्मी बाहर निकलकर बहादुर को आवाज देकर सचेत नहीं कर पा रहा था. हालांकि, गनीमत रही कि इसी दौरान वन विभाग की टीम वहां पहुंच गयी.

दीवार और पेड़ के बीच फंसा गजराज, विभाग ने निकाला

हाथी के घुसने की सूचना तुरंत वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को दी गयी थी. भुजुराम सोरेन के नेतृत्व में टीम जैसे ही पहुंची, जंगली हाथी वहां से भाग खड़ा हुआ. भागने के चक्कर में हाथी स्वर्णरेखा कॉलोनी की टूटी चहारदीवारी से होते हुए अंदर घुसने लगा, लेकिन इसी दौरान वह एक संकरी जगह पर दीवार और पेड़ के बीच में बुरी तरह फंस गया. करीब आधे घंटे तक हाथी खुद को निकालने के लिए छटपटाता रहा. इसके बाद क्यूआरटी ने भारी सूझबूझ और बहादुरी का परिचय देते हुए हाथी को वहां से सुरक्षित बाहर निकाला. टीम की गाड़ियों के सायरन की आवाज सुनकर हाथी आखिरकार हवाई पट्टी की ओर भाग गया.

बाहर सो रहे लोगों की बची जान

क्यूआरटी के भुजुराम सोरेन ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण स्वर्णरेखा कॉलोनी के कई लोग अपने घरों के बाहर खाट बिछाकर सो रहे थे. प्रखंड कार्यालय से भागने के बाद हाथी इसी रास्ते से बाहर निकलना चाहता था. यदि वह दीवार और पेड़ के बीच नहीं फंसा होता, तो खाट पर सो रहे कई मासूम ग्रामीण उसकी चपेट में आ सकते थे और भारी जान-माल का नुकसान हो सकता था. वन विभाग की मुस्तैदी और एक पेड़ के सहारे चाकुलिया में एक बड़ी त्रासदी टल गयी.

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Author: ATUL PATHAK

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