मालती कालिंदी अपने बेटे के साथ टूटी झोपड़ी में प्लास्टिक टांग रह रही, जमीन पर पर नहीं मिला सरकारी आवास
प्रतिनिधि, धालभूमगढ़: सरकार की विभिन्न आवास योजनाओं का लाभ आज भी सही लोगों तक नहीं पहुंच रहा है. प्रशासनिक उदासीनता, सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार एवं जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण गरीब, आदिवासी, हरिजन, आदिम जनजाति समुदाय के लोग आवास से वंचित हो रहे हैं. आज भी उन्हें जर्जर झोपड़ी में प्लास्टिक टांग कर जिंदगी गुजारनी पड़ रही है. कोकपाड़ा के दुलियापाड़ा में बुजुर्ग महिला का मालती कालिंदी अपने पुत्र रवि कालिंदी के परिवार के साथ आज भी टूटी जर्जर झोपड़ी में प्लास्टिक टांग कर गुजर-बसर करने को विवश हैं. जमीन उनके नाम होने के बावजूद भी ना तो उन्हें पीएम आवास, अबुआ आवास, जनमन आवास या अंबेडकर आवास का लाभ मिला है. मालती कालिंदी एवं उसके पुत्र रवि कालिंदी का कहना है कि कई बार पंचायत से लेकर प्रखंड तक गुहार लगायी गयी, सरकार आपके द्वारा शिविरों में आवेदन भी दिए पर उन्हें किसी भी आवास योजना का लाभ नहीं मिला है. लगभग 30-35 वर्ष पहले उन्हें इंदिरा आवास दिया गया था जो आज जर्जर होकर ढहने के कगार पर है. छत और प्लास्टर आये दिन झड़ते रहते हैं जिसके कारण बिस्तर पर प्लास्टिक बिछा कर रहने को मजबूर हैं.
वहीं दूसरी ओर कई सक्षम लोगों को तथा जिनके पूर्व से मकान है वैसे लोगों को भी आवास का लाभ दिया गया है. उन्होंने कहा कि इस बरसात के बीच भी प्लास्टिक टांग कर किसी प्रकार खुद और बेटे के परिवार को बचा रहे हैं. 30-35 साल पूर्व कोकपाड़ा कालिंदी बस्ती,नरसिंहगढ़ कालिंदी बस्ती में बना इंदिरा आवास, जो जर्जर हो चुका है. विदित हो कि लगभग 30-35 वर्ष पूर्व कोकपाड़ा कालिंदी बस्ती, नरसिंहगढ़ कालिंदी बस्ती में भी लोगों को इंदिरा आवास दिए गये थे जो आज पूरी तरह से जर्जर होकर जानलेवा हो गये हैं. बरसात के दिनों में लोग डर के साये में इन घरों में रह रहे हैं. कई बार सरकार से गुहार लगाने के बाद भी उन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिल रहा है. इस बारे में कोकपाड़ा के पंचायत सचिव विवेक राज से जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि वार्ड सदस्य को साथ लेकर आवास के लिए सर्वे किया गया है. मालती कालिंदी के आवास आवंटन की क्या स्थिति है वह दस्तावेज देखने के बाद ही बता पायेगे.
