घाटशिला.
कभी लाल आतंक के नाम से विख्यात पश्चिम बंगाल के लालगढ़ से मंगलवार को बांग्ला बचाओ यात्रा की शुरुआत हुई. लालगढ़ लाइब्रेरी मैदान में जनसभा की गयी. यहां माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने कहा कि जिन्होंने कभी लाल झंडे को मिटाने की बात कही थी, वही लालगढ़ आज लाल झंडों से पट गया है. जिन्होंने सोचा था कि सालकू सोरेन की हत्या कर वे मेहनतकश लोगों के आंदोलन को खत्म कर देंगे, वे गलत थे. इस सभा में जून 2009 में लालगढ़ के धरमपुर में नक्सली हमले में मारे गये सालकू सोरेन की मां छितामनी सोरेन भी उपस्थित थीं. सीपीएम का आरोप है कि माओवादी-तृणमूल गठजोड़ ने सालकू सोरेन की हत्या की थी. मो. सलीम ने छितामनी का मंच पर फूलों के माला से स्वागत किया.
इस बीच छितामनी सोरेन ने कांपती आवाज में कहा, “सभी को लाल सलाम.” मो. सलीम ने कहा कि जंगल महल में पार्टी के लगभग 350 शहीदों का खून बेकार नहीं जायेगा. संघर्ष के माध्यम से इसका प्रमाण मिलेगा. कहा गया था कि लाल हटाओ, देश बचाओ. लाल हट गया, लेकिन देश नहीं बचा.” उन्होंने 100 दिनों का काम, आवास योजना, शिक्षकों की नियुक्ति की कमी और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे की खराब स्थिति का जिक्र किया.
सभा में सीपीएम के झाड़ग्राम जिला सचिव प्रदीप सरकार ने कहा कि जिले में कोई उद्योग विकसित नहीं हुआ है. हाल में नेताई के छात्र-छात्राएं शिक्षक नियुक्ति की मांग को लेकर सभा में उपस्थित हुए थे. राज्य समिति के सदस्य अभय मुखर्जी ने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर लोगों का मंच तैयार करना होगा. राज्य समिति सदस्य पुलिन बिहारी बास्के ने कहा, “जिन्होंने लाल झंडा मिटाने की बात कही थी, आज लालगढ़ लाल झंडों से भर गया है. पश्चिम मेदिनीपुर जिला सचिव विजय पाल ने दावा किया कि बूथ स्तर पर संगठन बनाने के कारण सभा में लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिली है. छोटे मैदान को भरकर सीपीएम नेतृत्व ने जंगल महल में संगठन के पुनर्गठन का संदेश देने की कोशिश की है.
