Baharagora Vidhan Sabha: बहरागोड़ा सीट पर कांटे की टक्कर, क्या समीर मोहंती दूसरी बार दर्ज कर पाएंगे जीत

2014 में डॉ दिनेश षाड़ंगी के पुत्र कुणाल षड़ंगी झामुमो के टिकट पर विधायक बने. 2019 में समीर मोहंती झामुमो के टिकट पर जीते. उन्होंने भाजपा के कुणाल षाड़ंगी को पटखनी दी.

Baharagora Vidhan Sabha, चाकुलिया(पूर्वी सिंहभूम), राकेश सिंह: बहरागोड़ा 1967 में घाटशिला से अलग होकर अलग सीट बना. शिबू रंजन खां इस सीट से पहले निर्दलीय विधायक बने. बाद में शिबू रंजन खां कांग्रेस में शामिल हुए और 1969 व 1972 में चुनाव जीते.1972 में वे बिहार सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री बने. 1977 में कांग्रेस पार्टी के विष्णुपद घोष यहां से विधायक बने. वर्ष 1980 से वर्ष 2000 तक (20 वर्ष) बहरागोड़ा सीट पर कम्युनिस्टों का दबदबा रहा.

1980 में सीपीआई के देवीपदो उपाध्याय विधायक बने. वर्ष 1985, 1990 और 1995 में भी वे ही विधायक बने. वर्ष 2000 में डॉ दिनेश षाड़ंगी ने जीते. 2005 में भी भाजपा के टिकट पर वे विधायक बने व स्वास्थ्य मंत्री बने. वर्ष 2009 में डॉ षाड़ंगी को झामुमो प्रत्याशी विद्युत वरण महतो ने हरा दिया. तब से लेकर आज तक यह सीट झामुमो के कब्जे में है.

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भाजपा 10 वर्ष तथा झामुमो का 15 वर्ष तक रहा है दबदबा

2014 में डॉ दिनेश षाड़ंगी के पुत्र कुणाल षड़ंगी झामुमो के टिकट पर विधायक बने. 2019 में समीर मोहंती झामुमो के टिकट पर जीते. उन्होंने भाजपा के कुणाल षाड़ंगी को पटखनी दी. इस सीट पर कांग्रेस ने 11 वर्षों तक, कम्युनिस्टों ने 20 वर्षों तक, भाजपा ने 10 वर्ष तथा झामुमो ने 15 वर्ष तक राज किया. इस बार डॉ दिनेशानंद गोस्वामी को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है. जबकि सीटिंग विधायक समीर मोहंती को झामुमो ने एक बार फिर प्रत्याशी बनाया है. देखना होगा कि 15 वर्षों के झामुमो के दुर्ग पर डॉ दिनेशानंद गोस्वामी भगवा लहरा पाते हैं या नहीं.

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Author: Nitish kumar

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