जमशेदपुर से संदीप कुमार की रिपोर्ट
झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में भीषण गर्मी और लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब हर घंटे स्कूल में वाटर ब्रेक अनिवार्य होगा, जिससे बच्चों को डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याओं से बचाया जा सके. इस संबंध में पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसइ) आशीष कुमार पांडेय ने सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किया है.
ब्रेक से बच्चों को राहत, स्कूलों में सख्त मॉनिटरिंग के निर्देश
डीएसइ ने कहा कि भीषण गर्मी में बच्चों का स्वास्थ्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. हर घंटे घंटी बजाकर वाटर ब्रेक दिया जाएगा, जिससे सभी छात्र नियमित रूप से पर्याप्त पानी पी सकें. शिक्षकों और स्टाफ की यह व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि कोई भी बच्चा तेज गर्मी या लू की चपेट में न आए. यह निर्देश झारखंड में चल रही भीषण गर्मी के मौसम को देखते हुए जारी किया गया है. राज्यस्तर पर भी स्कूल टाइमिंग पहले ही सुबह के समय में बदली जा चुकी हैं, लेकिन पूर्वी सिंहभूम प्रशासन ने छात्रों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती है. शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे कदम न सिर्फ तुरंत राहत देंगे, बल्कि लंबे समय तक बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे. डीएसइ ने सभी स्कूल प्रबंधनों से निर्देशों का सख्ती से पालन करने की अपील की है और कहा कि अनुपालन की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी.
स्कूलों को ये व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी होंगी
- हर घंटे वाटर ब्रेक के दौरान छात्रों को साफ और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराना (घड़े, सुराही या फिल्टर पानी के माध्यम से).
- मध्याह्न भोजन छायादार स्थान पर ही परोसना तथा हाथ धोने की व्यवस्था भी छांव में रखना.
- छात्रों को स्कूल आने-जाने के दौरान सिर को टोपी, गमछा या छाते से ढककर आने की सलाह देना.
- स्कूल परिसर में ओआरएस, ग्लूकोज और प्राथमिक चिकित्सा किट की उपलब्धता सुनिश्चित करना.
- अभिभावकों से अपील कि वे बच्चों को पर्याप्त पानी देकर ही स्कूल भेजें. जरूरत पड़ने पर सनस्क्रीन जैसी सावधानियां भी बरतें.
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