बिना चहारदीवारी असुरक्षित महसूस करते हैं हम

प्रभात खबर महिला संवाद में गर्ल्स हाइस्कूल की छात्राओं ने सुनायी परेशानी

बेंच-डेस्क व अन्य संसाधनों की है कमी, नये भवन का नहीं हो पा रहा इस्तेमाल काठीकुंड. प्रभात खबर द्वारा आयोजित महिला संवाद के दौरान काठीकुंड प्रखंड स्थित प्रोजेक्ट गर्ल्स हाइस्कूल की छात्राओं ने कई समस्याएं खुलकर सामने रखीं. विद्यालय में फिलहाल नौवीं कक्षा में 29 तथा दसवीं कक्षा में 49 छात्राएं पढ़ रही हैं. बताया कि विद्यालय का नया भवन वर्षों से यूं ही पड़ा है. इस संबंध में विद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार विभाग के वरीय अधिकारियों के निर्देश पर स्कूल द्वारा केवल शौचालय उपयोग के लिए नये भवन को खोला गया है, लेकिन उसमें अभी तक पानी का मोटर तक नहीं लगाया गया है. विद्यालय में पानी की सुविधा के नाम पर सिर्फ चापानल उपलब्ध है. एक और चापानल नये भवन के बनाने के वक्त लगा था, जो विद्यालय कार्य पूर्ण होने के बाद से खराब पड़ा है. कक्षाएं अब भी पुराने भवन में ही संचालित हो रही है. संसाधनों की कमी के कारण नया भवन अब तक उपयोग में नहीं आ सका और मात्र शोभा की वस्तु बनकर रह गया है. प्रमुख समस्या सुरक्षा से जुड़ी है. यह स्कूल साहिबगंज-गोविंदपुर मुख्य मार्ग के किनारे स्थित है, लेकिन चहारदीवारी के अभाव में विद्यालय का पूरा परिसर असुरक्षित बना हुआ है. इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में कोयला वाहन व अन्य वाहन चलते रहते हैं. छात्राओं ने बताया कि दिनभर विद्यालय परिसर में मवेशी खुलेआम घूमते रहते हैं. स्कूल बंद होने के बाद यह जगह नशेड़ियों का अड्डा बन जाता है. शाम ढलते ही नशेड़ी यहां शराब पीकर मांस आदि का सेवन करते हैं. बोतलें व हड्डियां तक बरामदे में फेंक जाते हैं. इन गंदगियों की सफाई हर सुबह शिक्षिकाओं व छात्राओं को स्वयं करनी पड़ती है. बेंच-डेस्क, प्रयोगशाला और शैक्षणिक संसाधनों की कमी विद्यालय में प्रयोगशाला के नाम पर खाली कमरा है, जो फिलहाल स्टोर रूम के रूप में इस्तेमाल हो रहा है. छात्राओं ने बताया कि प्रयोगशाला में एक भी माइक्रोस्कोप नहीं है, जिससे विज्ञान की पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित रह गयी है. चार शिक्षिकाएं और एक शिक्षक, एक कंप्यूटर शिक्षक व एक क्लर्क नियमित रूप से विद्यालय में कार्यरत हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण वे भी पूर्ण शैक्षणिक माहौल नहीं बना पा रहे. छात्राओं ने बताया कि विद्यालय में लगे बेंच – डेस्क निहायत ही निम्न गुणवत्ता वाले हैं. मोटे कूट से बने बेंच-डेस्क कुछ महीनों पहले ही भेजे गये थे, लेकिन अब ये टूट रहे हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठता है. स्कूल के पास बने बस स्टॉप ग्रामीण क्षेत्रों से आनेवाली छात्राओं ने यातायात की समस्या को भी गंभीर बताया. कई छात्राएं दूर-दराज के गांवों से बस द्वारा स्कूल आती हैं, लेकिन बस स्कूल के सामने नहीं रुकती. नतीजतन, उन्हें काठीकुंड चौक से पैदल लगभग 400 मीटर तक आना पड़ता है. इस दौरान रास्ते में मनचलों द्वारा फब्तियां कसी जाती हैं, जो छात्राओं में असुरक्षा का भाव पैदा करती हैं. विद्यालय के पास बस स्टॉप का निर्माण कराया जाये. ताकि छात्राओं को सुरक्षित रूप से स्कूल आने-जाने की सुविधा मिल सके. क्या कहती हैं छात्राएं नया भवन वर्षों से पड़ा है, लेकिन इसका उपयोग सिर्फ शौचालय के लिए हो रहा है. पानी की सुविधा न के बराबर है. पुराने भवन में ही पढ़ाई हो रही है. संसाधनों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है. महिमा हेंब्रम, दसवीं हमारे स्कूल में चारदीवारी नहीं है. दिनभर परिसर में मवेशी रहते हैं और शाम को नशेड़ी शराब पीते हैं. स्कूल आने के बाद हमें खुद सफाई करनी पड़ती है. ऐसी स्थिति में सुरक्षित शिक्षा का सपना मुश्किल लगता है.” केरेटिना किस्कू, दसवीं प्रयोगशाला केवल एक खाली कमरा है, जिसमें एक भी माइक्रोस्कोप नहीं है. विज्ञान की पढ़ाई सिर्फ किताबों से कितनी समझ आ सकती है. बेंच-डेस्क भी टूट रहे हैं. संसाधनों की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है. प्रतिमा कुमारी, दसवीं हम दूर-दराज के गांवों से बस में आती हैं. लेकिन बस स्कूल के पास नहीं रुकती. हमें 400 मीटर पैदल चलना पड़ता है. मनचलों से परेशानी होती है. इसलिए स्कूल के पास बस स्टैंड की व्यवस्था होनी चाहिए. लीलमुनी सोरेन, दसवीं विद्यालय परिसर में सुविधाजनक बेंच-डेस्क नहीं है. मोटे कूट से बने बेंच-डेस्क कुछ महीनों में टूट चुके हैं. संसाधनों की कमी से पढ़ाई प्रभावित होती है. छात्राएं असुरक्षित माहौल में स्कूल आने से कतराती है. दीपमाला कुमारी, नवम हम छात्राएं सुरक्षित शिक्षा के लिए बस स्टॉप और चहारदीवारी की मांग कर रही है. बिना सुरक्षा और उचित सुविधाओं के विद्यालय सिर्फ पढ़ाई का स्थान नहीं रह जाता. प्रशासन को शीघ्र कदम उठाना चाहिए. शिल्पा कुमारी, नवम नये भवन में पानी का मोटर नहीं लगाया गया है. स्कूल में केवल एक चापानल है. दूसरा खराब पड़ा है. यह सुविधाओं की कमी छात्रों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर असर डालती है. समस्या जल्द दूर हो. प्रियंका कुमारी, दसवीं विद्यालय परिसर में चहारदीवारी का अभाव और बुरी अवसंरचना हमारे लिए रोजमर्रा की मुश्किलें पैदा करती है. सुरक्षा, संसाधन और सम्मान के बिना पढ़ाई का माहौल बनाना मुश्किल है. जल्द निदान हो. प्रीति सोरेन, दसवीं

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Published by: Rakesh kumar

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