खदान की नयी जनसुनवाई में पुराने वादों का हिसाब मांग बैठे ग्रामीण

दुमका : पत्थर खदान की जनसुनवाई में ग्रामीणों का गुस्सा फूटा. विकास के पुराने वादों को पूरा करने की मांग, नई खदान पर खड़े किए सवाल. जानिए क्या है पूरा मामला.

पहले वादों का हिसाब दो, फिर खोलो खदान! जनसुनवाई में ग्रामीणों का फूटा आक्रोश

दुमका : पत्थर खदान खोलने को लेकर आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई में ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया. शिकारीपाड़ा प्रखंड के सालबोना गांव में शुक्रवार को प्रस्तावित पत्थर खदान को लेकर हुई जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने पुराने वादों का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि खदान खोलने से पहले विकास के बड़े-बड़े वादे किये जाते हैं, लेकिन खदान शुरू होने के बाद उन वादों पर अमल नहीं होता.

पानी, बिजली, सड़क और शिक्षा के वादों का उठाया मुद्दा

ग्रामीणों ने कहा कि पहले भी कई खदानों की जनसुनवाई के दौरान गांव में पानी, बिजली, सड़क और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अपेक्षित काम नहीं हुआ. ग्रामीणों ने पूर्व में किये गये विकास संबंधी वादों को पूरा करने की मांग उठायी.

कुछ महीनों में पांच खदानों को लेकर हुई जनसुनवाई

बताया गया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान सालबोना गांव में पांच पत्थर खदानों को खोलने के लिए पर्यावरणीय जनसुनवाई आयोजित की गयी थी. उस दौरान संबंधित माइंस संचालकों की ओर से ग्रामीणों को गांव में आधारभूत सुविधाओं के विकास का भरोसा दिलाया गया था. ग्रामीणों का आरोप है कि स्वीकृति मिलने के बाद विकास के वे वादे जमीन पर नजर नहीं आये.

नयी खदान के आश्वासन पर पुराने वादों का मांगा हिसाब

शुक्रवार को एलायंस इंफ्रा एंड माइंस की प्रस्तावित पत्थर खदान को लेकर फिर जनसुनवाई हुई. कंपनी की ओर से ग्रामीणों के सामने विकास कार्यों को लेकर कई आश्वासन दिये गये. कंपनी की ओर से कहा गया कि खदान शुरू होने के बाद गांव में सुविधाओं के विकास पर काम किया जायेगा. इसी दौरान पुराने अनुभवों को लेकर ग्रामीण भड़क उठे और पहले किये गये वादों का हिसाब मांगने लगे.

अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने रखी नाराजगी

जनसुनवाई में दुमका की अपर समाहर्ता सुनीता किस्कू, अंचलाधिकारी कपिल देव ठाकुर तथा झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी मौजूद थे. अधिकारियों की मौजूदगी में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं और नाराजगी सामने रखी. अधिकारियों की ओर से ग्रामीणों को उनकी मांगों और पूर्व के आश्वासनों पर विचार करने का भरोसा दिया गया.

‘वादे होते हैं, लेकिन समस्याओं पर ध्यान नहीं’

ग्रामीण मनसा देहरी ने कहा कि खदानों की जनसुनवाई के दौरान विकास के कई वादे किये जाते हैं. ग्रामीण अपनी समस्याओं और गांव के विकास की उम्मीद में सहमति देते हैं, लेकिन बाद में उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता. उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने कई बार अपनी समस्याएं रखने का प्रयास किया, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया.

पूर्व के वादों पर गौर करने का भरोसा

जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि पूर्व में किये गये विकास संबंधी वादों पर गौर किया जायेगा. ग्रामीणों की ओर से पुराने आश्वासनों को पूरा करने और गांव में बुनियादी सुविधाओं के विकास की मांग प्रमुखता से रखी गयी.


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By Anand Jayswal

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