गोपीकांदर प्रखंड के ओडमो जंगल टोला में सोमवार को आदिवासी मूलवासी प्रभावित संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों ने सिलंगी-गुम्मामोड़ और मधुबन सड़क पर चलने वाले कोयला कंपनी के वाहनों का अनिश्चितकालीन चक्का जाम कर दिया. जाम का नेतृत्व आदिवासी मूलवासी प्रभावित संघर्ष समिति के अध्यक्ष सामुएल मुर्मू कर रहे हैं. आंदोलन में केवल कोल कंपनी के वाहनों को रोका गया है, जबकि आम लोगों और अन्य वाहनों को जाम से मुक्त रखा गया है.
अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी समस्या नजरअंदाज करने का आरोप
दर्जनों प्रभावित गांवों के रैयतों ने कहा कि अपनी जन समस्याओं को लेकर अंचल, थाना और जिला के वरीय अधिकारियों को लिखित सूचना दी गयी थी. ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी समस्या को नजरअंदाज कर दिया गया. इसके बाद मजबूरन सड़क जाम करना पड़ा. ग्रामीणों ने कहा कि जब तक कोल कंपनी के अधिकारी उनके साथ जनसुनवाई नहीं करते, तब तक चक्का जाम जारी रहेगा.
जनसुनवाई नहीं होने का लगाया आरोप
आदिवासी मूलवासी प्रभावित संघर्ष समिति के अध्यक्ष सामुएल मुर्मू और सदस्य मदन राय ने तीन प्रमुख मांगों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि नियमानुसार माइनिंग शुरू होने से पहले प्रभावित क्षेत्रों के सभी गांवों में वास्तविक जनसुनवाई होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी द्वारा बिना परामर्श, सहमति और जनसुनवाई के किसी अन्य दूरस्थ क्षेत्र में खानापूर्ति कर माइनिंग का कार्य चुपचाप चलाया जा रहा है.
पर्यावरण, स्वास्थ्य और खेती पर असर का दावा
ग्रामीणों ने कहा कि ओडमो पंचायत के सभी प्रभावित क्षेत्रों के लोग खनन कार्य से सीधे प्रभावित हो रहे हैं. उनके अनुसार, पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि, पीने के पानी और भूमि पर असर पड़ रहा है. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावित लोगों को मिलने वाले उचित मुआवजा, रोजगार, विस्थापन और सामाजिक लाभ जैसे सीएसआर लाभांश के संबंध में कंपनी की ओर से कोई जानकारी या पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है.
सैकड़ों ग्रामीण आंदोलन में रहे मौजूद
आंदोलन के दौरान राजदीप मुर्मू, सोकोल मरांडी, हेमलाल सोरेन, नरेश हेंब्रम, मनोज सोरेन, देव हांसदा, लखीराम राय, राजकुमार हांसदा, चुड़का मुर्मू, रामु सोरेन, सुनील मरांडी सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे.
