दुमका (आनंद जायसवाल). उपराजधानी दुमका में नगर परिषद प्रशासन द्वारा तीन साल पहले लगवाये गये 210 में से 142 सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे हैं या इतनी बड़ी संख्या में कैमरे से सिग्नल कंट्रोल रूम तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. शनिवार को प्रभात खबर की टीम ने अपनी पड़ताल में पाया कि विभागीय स्तर पर लगवाये गये 68 कैमरे ही काम कर रहे हैं, जिनमें कुछ पीटीजेड कैमरे के फंक्शन में तकनीक गड़बड़ी ही है. जिनमें से खुटाबांध के पास का कैमरा मूव नहीं कर रहा, तो कुछ दूसरे लोकेशन में जूम नहीं हो पा रहा. यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि इसके ऑपरेशन व मैनटेनेंस के लिए विभाग के पास अपनी कोई टीम नहीं है. जिस एजेंसी ने इसे लगाया था, उसे दो साल तक ही ऑपरेशन व मैनटेनेंस करना था. यह अवधि बीत चुकी है. दुमका में जब 2022-23 में ये सीसीटीवी कैमरे लगाये गये थे, तब शहर में काफी हद तक क्राइम कंट्रोल भी था. अब सीसीटीवी कैमरे खराब रहने से क्राइम करनेवाले अपराधियों को दबोचने में भी पुलिस को अधिक माथापच्ची करनी पड़ती है. पहले सीसीटीवी कैमरों के खूब प्रभावी रहने से उच्चकों-मनचलों से लेकर स्पीड राइडर थी निगहबानी की वजह से थर्राते थे. इन दिनों रसिकपुर, टाउन थाना के आसपास, दुर्गास्थान, लाल पोखरा के आसपास कैमरे खराब पड़े हुए हैं. अग्रेसन भवन खुटाबांध व दुधानी में पीटीजेड कैमरे बंद पड़े हैं. अभी कई बार आपराधिक घटना के बाद पुलिस को लोगों के घर-दुकानों या बाहर लगे प्राइवेट सीसीटीवी कैमरे को खंगालना पड़ता है. वहां कैमरे की गुणवत्ता सही नहीं रहने का खामियाजा भी अनुसंधान के दौरान भुगतना पड़ता है. जबकि प्रशासनिक स्तर पर लगे सभी कैमरे बेहद ही उच्च गुणवत्ता के हैं. दो अधिकारी व चार जवान तैनात : पूरे शहर में लगे सीसीटीवी कैमरे की मॉनीटरिंग दुमका के कंट्रोल रूम में होती है. कंट्रोल रूम में चौबीस घंटे स्क्रीन पर नजर रखी जाती है. इसके लिए दो अधिकारी एवं चार सिपाहियों की तैनाती की गयी है. सात स्क्रीन पर दिखनेवाले 32-32 कैमरे के दृश्य पर नजर रखने के लिए पहले आठ सिपाहियों का पदस्थापन था, पर इन दिनों आधे मानव बल से काम चलाया जा रहा है. ये लोग समय-समय पर रैंडमली कैमरे के दृश्य को इनलार्ज करके देखते रहते हैं. पीटीजेड कैमरे को दाये-बायें करके भी इन्हें सारे नजारे पर नजर रखनी होती है. दो करोड़ से लगेंगे 300 से अधिक नये कैमरे : दुमका नगर परिषद ने हाल ही में एक डीपीआर यानी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाकर नगर विकास विभाग को भेजा है. इस डीपीआर में 300 से अधिक कैमरे लगाये जाने का प्रस्ताव है. इस परियोजना से दुमका के उन इलाकों को भी पैनी निगहबानी की जद में लाने की तैयारी है, जहां छोटी-मोटी घटनाएं घटती रहती है या जो इलाके अब तक कवरेज से वंचित रहे हैं या जिन इलाकों में सीसीटीवी लगाने की आवश्यकता महसूस की गयी है. इन आवश्यकताओं का आकलन किया गया है. दुमका नगर परिषद के प्रशासक शीतांशु खालको ने बताया कि दिशा-निर्देशों के अनुरूप डीपीआर बनाकर भेजा गया है. इसमें बुलेट, पीटीजेड व सोलर एनर्जी से संचालित सीसीटीवी कैमरे के अधिष्ठापन का प्रस्ताव है.
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