पानी के लिए लगी जलमीनार, अब बच्चे उसी सोलर से चार्ज कर रहे मोबाइल

नल-जल योजना के तहत लगी सोलर संचालित जलमीनार तीन साल से बंद. मोटर खराब, ग्रामीण पानी के लिए परेशान. बच्चे सोलर से मोबाइल चार्ज कर रहे.

रानीश्वर: प्रखंड के बिलकांदी पंचायत अंतर्गत आदिम जनजाति पहाड़िया बहुल गांव चकइंद्रप्रसाद में हर घर नल जल पहुंचाने के उद्देश्य से लगायी गयी सोलर संचालित जलमीनार लंबे समय से बेकार पड़ी है. मोटर खराब होने के बाद जलापूर्ति पूरी तरह बंद है. करीब तीन साल पहले कल्याण विभाग की ओर से लगायी गयी जलमीनार अब ग्रामीणों के लिए पानी की सुविधा देने के बजाय शोभा की वस्तु बनी हुई है.

मोटर खराब होते ही बंद हो गयी जलापूर्ति

जानकारी के अनुसार, करीब तीन साल पहले कल्याण विभाग की ओर से गांव में डीप बोरिंग कर कंक्रीट की जलमीनार का निर्माण कराया गया था. जलमीनार की छत पर सोलर प्लेट लगायी गयी थी, ताकि सोलर ऊर्जा से मोटर चलाकर ग्रामीणों के घरों तक पानी पहुंचाया जा सके.

निर्माण के बाद कई महीने तक जलमीनार से नियमित जलापूर्ति हुई. इसी दौरान घर-घर नल कनेक्शन भी दिया गया. लेकिन मोटर खराब होने के बाद पानी की सप्लाई बंद हो गयी और तब से ग्रामीण चापानल के भरोसे हैं.

मरम्मत के नाम पर मोटर खोलकर ले गया मिस्त्री

ग्रामीणों के अनुसार, मोटर खराब होने के बाद एक मिस्त्री गांव पहुंचा था. वह मरम्मत कराने के नाम पर जलमीनार का मोटर खोलकर अपने साथ ले गया. इसके बाद न तो मोटर की मरम्मत करायी गयी और न ही नया मोटर लगाया गया.

नतीजा यह है कि जलमीनार लंबे समय से बेकार पड़ी है. ग्रामीणों को नल से पानी मिलने की योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

30 पहाड़िया परिवार और दो संस्थान प्रभावित

चकइंद्रप्रसाद गांव में करीब 30 पहाड़िया परिवार रहते हैं. गांव में एक आंगनबाड़ी केंद्र और एक यूपीएस स्कूल भी है. जलमीनार बंद रहने से ग्रामीणों के साथ बच्चों और विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों को भी पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

फिलहाल ग्रामीण चापानल के पानी से अपनी जरूरत पूरी कर रहे हैं.

खबरें और शिकायतें भी बेअसर

जलमीनार से जलापूर्ति बंद होने की समस्या को लेकर कई बार अखबारों में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हो चुकी है. ग्रामीणों की ओर से भी संबंधित विभाग से शिकायत की गयी है. इसके बावजूद अब तक जलमीनार की मरम्मत कराकर जलापूर्ति शुरू नहीं करायी जा सकी है.

ग्रामीणों का कहना है कि योजना पर खर्च होने के बावजूद यदि पानी ही नहीं मिल रहा है, तो इसका उद्देश्य ही अधूरा रह गया है.

बगल से गुजरी पाइपलाइन, फिर भी गांव प्यासा

चकइंद्रप्रसाद गांव के बगल से कोलारकोंदा-गोबिंदपुर ग्रामीण जलापूर्ति योजना की पाइपलाइन भी बिछायी गयी है. बताया गया कि श्यामपुर की ओर से पाइपलाइन चकइंद्रप्रसाद गांव के बगल से शिलाजुड़ी तक पहुंचायी गयी है. इसके बावजूद पहाड़िया बहुल गांव तक पाइपलाइन नहीं बिछायी गयी.

हालांकि, गोबिंदपुर जलापूर्ति योजना से भी लंबे समय से जलापूर्ति ठप रहने की बात ग्रामीणों ने बतायी.

जलमीनार के सोलर से मोबाइल चार्ज कर रहे बच्चे

जलमीनार से पानी की एक बूंद नहीं निकल रही, लेकिन इसके लिए लगाये गये सोलर सिस्टम का इस्तेमाल गांव के बच्चे जरूर कर रहे हैं. पानी की सुविधा नहीं मिलने के कारण बच्चे जलमीनार में लगे सोलर से मोबाइल फोन चार्ज करते नजर आते हैं.

ग्रामीणों की मांग है कि जलमीनार के खराब मोटर की जल्द मरम्मत कराकर घर-घर नल से पानी की आपूर्ति शुरू करायी जाये, ताकि योजना का वास्तविक लाभ पहाड़िया परिवारों को मिल सके.

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लेखक के बारे में

By साधन सेन

वर्ष 1999 के नवंबर महीने से प्रभात खबर अखबार में पत्रकारिता शुरू की. दुमका के रानीश्वर प्रखंड से पत्रकारिता करते हुए जनहित की खबरों को प्राथमिकता देना, हमेशा मेरा ध्येय रहा है.

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