प्रतिनिधि, बासुकिनाथ. राजकीय श्रावणी मेला महोत्सव 2026 के 29वें दिन गुरुवार को बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. सावन की पावन बेला में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे कांवरियों के बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा बासुकिनाथ धाम शिवमय हो उठा. शिवगंगा घाट से लेकर मंदिर परिसर तक कांवरियों की लंबी कतार और चारों ओर गूंजते बाबा के जयकारे भक्तिमय वातावरण का एहसास करा रहे.
गुरुवार को 1:58 बजे बाबा बासुकिनाथ के गर्भगृह का पट खोला गया. सरकारी पूजा संपन्न होने के बाद करीब दो बजे से कांवरियों के लिए जलार्पण शुरू हुआ. श्रद्धालुओं ने अरघा के माध्यम से बाबा फौजदारीनाथ पर पवित्र जल अर्पित कर सुख-शांति, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की. भोर से ही मंदिर परिसर के बाहर तक कांवरियों की कतार लग गई थी. महिला और पुरुष श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा के दर्शन और जलार्पण के लिए आगे बढ़ते रहे.
हर कदम में शिव, हर सांस में बाबा का नाम
कंधे पर कांवर, हाथों में जल का लोटा और मुख पर बाबा का जयकारा लिए शिवभक्त कठिन यात्रा की थकान भूलकर उत्साह के साथ मंदिर की ओर बढ़ते रहे. कई कांवरिये नाचते-गाते और बोल बम का जयघोष करते हुए बाबा के दरबार पहुंचे. उनके चेहरों पर थकान के बजाय आस्था और उत्साह नजर आया. श्रद्धालुओं के लिए बाबा पर गंगाजल अर्पित करना उनकी कांवर यात्रा की सबसे बड़ी आध्यात्मिक उपलब्धि रही.
काउंटर पर श्रद्धालुओं ने किया बाबा का अभिषेक
मंदिर संकीर्तनशाला के समीप जलार्पण काउंटर के माध्यम से भी श्रद्धालुओं ने बाबा पर जल चढ़ाया. इस व्यवस्था को कांवरिये इंटरनेट जलार्पण के नाम से जानते हैं. काउंटर पर लगाए गए दस एलईडी टीवी के माध्यम से गर्भगृह में होने वाले जलार्पण का लाइव दर्शन कराया गया. इससे लंबी कतार में शामिल नहीं होने वाले श्रद्धालुओं को भी बाबा का दर्शन और जलार्पण करने की सुविधा मिली.
मंदिर परिसर में अधिकारियों की निगरानी में कांवरियों को सुगमतापूर्वक प्रवेश कराया गया. शिवगंगा घाट से मंदिर तक श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन की टीम लगातार सक्रिय रही. पूरे मेला क्षेत्र में बोल बम और हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गुंजायमान रहा.
कठिन यात्रा के बाद मिली भक्ति की मंजिल
बासुकिनाथ धाम में गुरुवार को भक्ति का ऐसा रंग देखने को मिला, मानो हर कांवरिया स्वयं को बाबा भोलेनाथ के चरणों में समर्पित कर चुका हो. कठिन यात्रा के बाद बाबा के दरबार में पहुंचकर जलार्पण करने के साथ ही श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष और मन में अद्भुत शांति का भाव दिखाई दिया. यही आस्था और विश्वास बासुकिनाथ की कांवर यात्रा को आध्यात्मिक अनुभूति में बदल देता है.
