कौड़ियां साधु टोला में आठ माह से चापानल खराब, कच्ची सड़क से करते हैं आवाजाही

प्रभात खबर महिला संवाद में गांव की महिलाओं ने सुनायी परेशानी, कहा

काठीकुंड. प्रखंड की पंदनपहाड़ी पंचायत के अंतर्गत कौड़ियां साधु टोला में ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं. आदिवासी बहुल टोला में लगभग 50 घर है. प्रभात खबर के महिला संवाद में महिलाओं ने बताया कि टोले में लगे कुल चार चापानल लंबे समय से खराब पड़े हैं. इस समस्या की सुधि न तो स्थानीय जनप्रतिनिधि ले रहे हैं. न ही विभाग से मरम्मत की पहल हो रही है. पानी की गंभीर समस्या ने लोगों को मजबूर कर दिया है कि वे प्रतिदिन काफी दूर जाकर पानी ला रहे हैं. स्थिति यह है कि महिलाओं और बच्चों को भी सुबह-शाम पानी लाने में घंटों का समय लगाना पड़ता है. गर्मी में जहां लोग घरों में खुद को सुरक्षित कर रहे थे, वहीं यहां के ग्रामीणों को उस मौसम में पानी की बूंद – बूंद के लिए जद्दोजेहद करनी पड़ी थी, जो आज भी जारी है. पानी की समस्या के साथ-साथ सड़क की स्थिति भी बेहद खराब है. साधु टोला तक पहुंचने वाली लगभग एक किलोमीटर लंबी सड़क अब भी कच्ची है. यहां के ग्रामीणों ने अफसोस जताया कि जहां दुर्गम से दुर्गम जगहों पर पक्के सड़क का निर्माण हो चुका है, वहीं उनके गांव में पक्की सड़क की सुधि लेने वाला कोई नहीं. बरसात में रास्ता कीचड़ और पानी से भरकर दुर्गम हो जाता है. बीमार मरीजों को अस्पताल ले जाना या बच्चों को स्कूल भेजना ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. ग्रामीणों ने बताया कि नेताओं और अधिकारियों को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. महिलाओं का कहना है कि “हमारे टोले में सब कुछ खराब है, न पानी की व्यवस्था है, न पक्की सड़क. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द चापाकलों की मरम्मत करायी जाये. कच्ची सड़क को पक्की सड़क में बदला जाये. बहरहाल, कौड़ियां साधु टोला के हालात यह दिखाते हैं कि आज भी ग्रामीण इलाकों में मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव बना हुआ है. क्या कहतीं हैं टोला की महिलाएं आठ महीनों से चापाकल खराब पड़े हैं. महिलाएं और बच्चे रोज दूर से पानी ढोकर लाते हैं. विभागीय पदाधिकारी सूधि नहीं ले रहे हैं. पानी नहीं मानो जीवन कठिन हो गया है. सुमोती मुर्मू “बरसात में कीचड़ और पानी से रास्ता दुर्गम हो जाता है. मरीजों को अस्पताल ले जाना या बच्चों को स्कूल भेजना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. जल्द होनी चाहिए. झोमोली टुडू हमारे टोले की सड़क अब भी कच्ची है. पक्की सड़क का सपना वर्षों से अधूरा है. सिर्फ आश्वासन दिया जाता है, समाधान कभी नहीं हुआ. जनप्रतिनिधि उदासीन बने हैं. सोनामुनी मरांडी पानी की गंभीर समस्या ने हमें मजबूर कर दिया है. हर रोज घंटों पानी लाने में समय जाता है. गर्मी में स्थिति और भी भयावह हो जाती है. बरसात में सड़क परीक्षा ले रही है. जुलिता सोरेन आज तक अधिकारियों ने हमारी सुधि नहीं ली, जहां दूर-दराज इलाकों में सड़क बन गयी, वहीं हमारे गांव में आज भी लोग कच्ची राह पर फिसलने को मजबूर हैं. मारंगबिटी किस्कू गर्मी में लोग घरों में छिपे रहते थे. हम पानी की तलाश में भटकते थे. बच्चों और महिलाओं की परेशानी को कोई समझने वाला नहीं है. जल्द खराब चापानल की मरम्मत हो. मिरु सोरेन टोले में चारों चापाकल खराब पड़े हैं. लोग बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे थे बीते गर्मी में और आज भी वहीं हाल है. यह हालात हमें वर्षों पीछे धकेल रहे हैं. शांति सोरेन सड़क और पानी की समस्या से जीवन हर दिन कठिन होता जा रहा है. 21वीं सदी में भी बुनियादी समस्यायों से जूझ रहे हैं. उसमें यह हाल रहे तो क्या ही कहा जा सकता है.” मकलू हांसदा

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Published by: Rakesh kumar

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