जिला संयुक्त औषधालय की बदहाल स्थिति, यूनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सक भी नहीं
दुमका : आमतौर पर सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिलने की शिकायत सामने आती है. लेकिन दुमका का जिला संयुक्त औषधालय ऐसा अस्पताल है, जहां मरीजों से ज्यादा यहां काम करने वाले कर्मियों को अपनी सुरक्षा की चिंता सता रही है. शहर के बीचोंबीच स्थित अस्पताल भवन की हालत बेहद जर्जर हो चुकी है. छत जगह-जगह से टूट रही है और सरिया बाहर निकल आयी है. ऐसे में कर्मियों को हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहता है.
बारिश में छत से टपकता पानी, उपकरण बचाना चुनौती
जर्जर भवन की समस्या बारिश के दिनों में और गंभीर हो जाती है. छत से पानी टपकने के कारण कमरों में रखे कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है. कंप्यूटर ऑपरेटर अनन्त कुमार ने बताया कि बारिश के दौरान सामान को पानी से बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है. भवन की स्थिति देखकर हमेशा डर बना रहता है कि कहीं छत का कोई हिस्सा अचानक नीचे न गिर जाए.
न पानी की सुविधा, न कर्मचारियों के लिए वॉशरूम
अस्पताल में कर्मचारियों के लिए मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है. यहां एक अदद वॉशरूम तक उपलब्ध नहीं है. सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक ड्यूटी करने वाले कर्मियों को शौच आदि के लिए अस्पताल से बाहर जाना पड़ता है. महिला कर्मियों के लिए यह समस्या और भी गंभीर है. कर्मचारियों के अनुसार अस्पताल में पीने और दैनिक उपयोग के लिए पानी की भी समुचित व्यवस्था नहीं है.
तीन चिकित्सा पद्धतियां, लेकिन एक ही चिकित्सक के भरोसे इलाज
जिला संयुक्त औषधालय में यूनानी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक पद्धति से इलाज की व्यवस्था है, लेकिन वर्तमान में यहां यूनानी और आयुर्वेदिक चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं. सिर्फ होम्योपैथिक चिकित्सक के भरोसे मरीजों का इलाज चल रहा है. चिकित्सकों की कमी का असर मरीजों की संख्या पर भी पड़ रहा है.
रोज 30 से 35 मरीज पहुंचते हैं अस्पताल
पदस्थापित होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. सुजीत कुमार ने बताया कि प्रतिदिन औसतन 30 से 35 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. उन्होंने अस्पताल भवन की खराब स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि भवन और आधारभूत सुविधाओं में सुधार होने पर मरीजों की संख्या बढ़ सकती है और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी.
शहर के बीच अस्पताल, फिर भी बदहाली से उठ रहे सवाल
दुमका शहर के बीचोंबीच स्थित जिला संयुक्त औषधालय का उद्देश्य लोगों को यूनानी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था. लेकिन जर्जर भवन, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव तथा चिकित्सकों की कमी ने अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये हैं. कर्मियों को जहां अपनी सुरक्षा की चिंता है, वहीं चिकित्सकों की कमी से मरीजों को भी अपेक्षित स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है.
बड़ी अनहोनी से पहले जागे प्रशासन
कर्मियों ने जिला प्रशासन और सरकार से अस्पताल भवन की शीघ्र मरम्मत कराने, पेयजल और शौचालय की व्यवस्था करने तथा आवश्यक चिकित्सकों की पदस्थापना की मांग की है. अब सवाल यह है कि जिम्मेदार विभाग जर्जर भवन और बदहाल व्यवस्था को कब तक नजरअंदाज करता रहेगा. समय रहते कदम नहीं उठाये गये तो किसी बड़ी अनहोनी के बाद प्रशासन की नींद खुलने का इंतजार करना पड़ सकता है.
