खेत की फसल से होती है मां दुर्गा की पूजा, काठीकुंड के मंदिर की अनूठी परंपरा

काठीकुंड के जनप्रिय दुर्गा मंदिर में मां दुर्गा की पूजा की एक अनूठी परंपरा है. मंदिर की कृषि भूमि से होने वाली फसल की आमदनी का उपयोग पूजा-अर्चना में किया जाता है. अब जनसहयोग से इसे भव्य रूप दिया जा रहा है.

प्रतिनिधि, काठीकुंड: दुमका जिले के काठीकुंड स्थित जनप्रिय दुर्गा मंदिर का इतिहास जितना पुराना है, यहां मां दुर्गा की पूजा की परंपरा भी उतनी ही अनूठी है. वर्षों से मंदिर की पूजा के लिए निर्धारित कृषि भूमि से होने वाली फसल की आमदनी का उपयोग मां दुर्गा की पूजा-अर्चना में किया जाता रहा है. समय बदला, पूजा का स्वरूप बदला, लेकिन यह पुरानी परंपरा आज भी कायम है.

पूजा के लिए परिवार ने दी थी जमीन

जानकारी के अनुसार, वर्षों पूर्व क्षेत्र में मंडल समाज के एक संपन्न परिवार का सामाजिक प्रभाव था. परिवार के सदस्यों ने दुर्गा मंदिर का निर्माण कराकर मां दुर्गा की पूजा शुरू करायी थी.

पूजा के नियमित आयोजन और उससे जुड़े खर्चों की व्यवस्था के लिए परिवार की ओर से जमीन उपलब्ध करायी गयी. इस जमीन पर हर वर्ष होने वाली फसल की आमदनी से पूजा के जरूरी खर्चों का वहन किया जाता रहा है.

बारी के हिसाब से संभालते हैं पूजा की व्यवस्था

पूजा की व्यवस्था को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए परिवार के सदस्यों के बीच बारी यानी पाली निर्धारित की गयी है. संबंधित सदस्य अपनी बारी के अनुसार पूजा के लिए निर्धारित जमीन से होने वाली उपज और उसकी आमदनी की व्यवस्था देखते हैं.

इस तरह खेत से निकलने वाली फसल सिर्फ कृषि उपज नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी पूजा परंपरा को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनी हुई है.

जनसहयोग से अब पूजा को दिया जा रहा भव्य रूप

समय के साथ जनप्रिय दुर्गा मंदिर में पूजा का स्वरूप भी विस्तृत हुआ है. पूजा के अलावा मंदिर की सजावट, लाइटिंग, रंगरोगन और अन्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए हाल के वर्षों में जनप्रिय दुर्गा पूजा समिति का गठन किया गया है.

मंगलवार को काठीकुंड बाजार स्थित जनप्रिय दुर्गा मंदिर में दुर्गा पूजा के आयोजन को लेकर समिति की बैठक हुई. इसमें आगामी पूजा को भव्य और आकर्षक बनाने को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गयी.

इस बार 2.50 लाख रुपये का बजट

बैठक में इस वर्ष दुर्गा पूजा आयोजन के लिए करीब 2.50 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया गया. समिति की ओर से मंदिर के रंगरोगन, मां दुर्गा की प्रतिमा निर्माण, आकर्षक लाइट डेकोरेशन समेत अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की गयी.

समिति का प्रयास है कि इस बार पूजा आयोजन को पहले से और बेहतर स्वरूप दिया जाए, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर माहौल मिल सके.

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नई समिति संभाल रही पूजा की जिम्मेदारी

जनप्रिय दुर्गा पूजा समिति में आशीष कुमार दे को अध्यक्ष, जितेंद्र पाल को सचिव और प्रशांत कुमार दत्ता को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी है.

समिति के सदस्यों में सुमन कुमार मंडल, गणेश कुमार मंडल, मनोज नाग, राम पाल, स्वपन नाग, शंभू पाल, गंगा पाल, प्रदीप मंडल, प्रदीप गोन, मोहन पाल, आकाश पाल और धनंजय पाल सहित अन्य लोग शामिल हैं. सभी सदस्य पूजा आयोजन को सफल बनाने में अपनी भूमिका निभाएंगे.

फसल से पूजा तक, आस्था की पुरानी परंपरा कायम

जनप्रिय दुर्गा मंदिर की खासियत सिर्फ यहां होने वाली दुर्गा पूजा नहीं है, बल्कि पूजा के पीछे वर्षों से चली आ रही वह व्यवस्था भी है, जिसमें कृषि भूमि से मिलने वाली आमदनी मां दुर्गा की आराधना में समर्पित की जाती है.

एक परिवार द्वारा शुरू की गयी यह परंपरा अब जनसहयोग के साथ आगे बढ़ रही है. यही वजह है कि काठीकुंड बाजार का यह मंदिर पूजा और आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की पुरानी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा की पहचान भी बन गया है.

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By Abhishek

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