सत्ता को साधन नहीं, सेवा का माध्यम मानते थे कर्पूरी ठाकुर

सामाजिक संगठनों ने भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनायी. उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया.

दुमका. दुमका में भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की जयंती विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनायी गयी. जननायक कर्पूरी लोहिया विचार मंच के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में कई सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया. वक्ताओं ने जननायक कर्पूरी ठाकुर को स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक न्याय के पुरोधा और गरीबों के मसीहा के रूप में याद किया. बताया गया कि आपातकाल के दौरान उन्होंने डॉ राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण सहित अन्य नेताओं के साथ लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया. हिंदी भाषा के प्रबल समर्थक कर्पूरी ठाकुर ने बिहार में अंग्रेजी की अनिवार्यता समाप्त कर हिंदी को अनिवार्य विषय बनाया, जिससे असंख्य गरीब विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला. इस अवसर पर मंच के संस्थापक अध्यक्ष राधारमण ठाकुर ने अपनी अस्वस्थता एवं आयु का हवाला देते हुए संगठन के पदाधिकारियों से कार्यकारी अध्यक्ष के चयन पर विचार करने का आग्रह किया. साथ ही वक्ताओं ने कर्पूरी ठाकुर के विचारों और साहित्य पर आधारित पुस्तकालय स्थापित करने की मांग की, ताकि युवा पीढ़ी उनके विचारों से प्रेरणा ले सके. प्रतिमा पर माल्यार्पण करने वालों में राधारमण ठाकुर, अजय कुमार झा मिक्की, राजेश राउत, रंजीत जयसवाल, डॉ अनहद लाल, धर्मराज ठाकुर, राष्ट्रीय नाई महासभा के जिलाध्यक्ष नंदकिशोर भंडारी, प्रदीप भंडारी, अनिल भंडारी, सुधीर भंडारी, सोनू ठाकुर, दीपक ठाकुर, मनोज ठाकुर, उज्ज्वल दास सहित अन्य गणमान्य लोग शामिल रहे. इसी क्रम में राष्ट्रीय नाई महासभा के तत्वावधान में भी जिलाध्यक्ष नंदकिशोर भंडारी के नेतृत्व में जयंती समारोह आयोजित किया गया. वक्ताओं ने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर का पूरा जीवन सामाजिक समरसता, समानता और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित रहा. उज्ज्वल दास ने युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाकर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया. वहीं सिविल सोसायटी, पटेल सेवा संघ और शहीद सरदार भागवत राउत विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में भी जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती मनायी गयी. कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर सादगी, ईमानदारी और सेवा भाव की राजनीति के प्रतीक थे. उन्होंने सत्ता को साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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By BINAY KUMAR

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