प्रतिनिधि, बासुकिनाथ. सावन के पवित्र महीने में सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर पहुंचने वाले कांवरियों की धार्मिक यात्रा बासुकिनाथ धाम पहुंचने के बाद पूर्ण मानी जाती है. बाबा बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग पर जलार्पण के बाद बाबा फौजदारीनाथ का दर्शन और पूजन करने से कांवर यात्रा का संपूर्ण फल प्राप्त होने की मान्यता है. यही वजह है कि देवघर से बासुकिनाथ तक की यात्रा में कांवरियों का उत्साह देखते ही बनता है. कंधे पर कांवर और जुबां पर बोल बम का जयघोष करते हुए श्रद्धालु बाबा फौजदारीनाथ के दरबार तक पहुंचते हैं.
कांवरिये सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर कठिन पैदल यात्रा करते हुए देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं. इसके बाद बाबा फौजदारीनाथ के दरबार बासुकिनाथ की ओर रवाना होते हैं. थकान से भरी लंबी यात्रा के बावजूद बाबा के दरबार में पहुंचते ही श्रद्धालुओं के चेहरे पर अलग ही उत्साह और संतोष नजर आता है.
बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में अटूट आस्था
बासुकिनाथ पहुंचने के बाद कांवरिये बाबा फौजदारीनाथ का दर्शन और गंगाजल से जलाभिषेक करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में सच्चे मन से की गयी प्रार्थना अवश्य पूरी होती है. श्रद्धालु यहां परिवार की सुख-शांति, समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं.
कई श्रद्धालु ऐसी मनोकामना पूर्ण होने के बाद दोबारा बाबा के दरबार में पहुंचकर आभार भी व्यक्त करते हैं. भक्तों का विश्वास है कि फौजदारीनाथ के दरबार में पहुंचकर लगायी गयी फरियाद अनसुनी नहीं जाती. सावन में लाखों कांवरियों की भीड़ इसी अटूट विश्वास के साथ बासुकिनाथ पहुंचती है और बाबा के चरणों में अपनी मनोकामना अर्पित करती है.
विवाह से रोजगार तक, बाबा से मांगते हैं मनवांछित फल
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबा फौजदारीनाथ के पावन दरबार में सच्चे मन से मांगी गयी मनोकामना पूरी होती है. यही आस्था भक्तों को विवाह, संतान, रोजगार, व्यापार, पारिवारिक सुख-समृद्धि सहित विभिन्न इच्छाओं की पूर्ति के लिए बाबा की शरण में खींच लाती है.
कांवरिये बाबा के दरबार में गंगाजल अर्पित कर अपनी मनोकामना निवेदित करते हैं और सुख-शांति, समृद्धि तथा मंगलमय जीवन का आशीर्वाद मांगते हैं. जलार्पण और पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु स्वयं को धन्य मानते हुए बाबा का आशीर्वाद लेकर आगे की यात्रा पर निकलते हैं.
फौजदारी दरबार को कहा जाता है कांवरियों का ‘सुप्रीम कोर्ट’
बाबा फौजदारीनाथ का दरबार, बासुकिनाथ धाम कांवरियों के बीच ‘सुप्रीम कोर्ट’ के नाम से भी प्रसिद्ध है. इसके पीछे श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और धार्मिक विश्वास जुड़ा है. मान्यता है कि देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के बाद बासुकिनाथ पहुंचकर बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में अपनी फरियाद रखने से कांवर यात्रा सार्थक होती है.
यही वजह है कि देवघर में जलार्पण के बाद कांवरियों के कदम बासुकिनाथ की ओर बढ़ते हैं. कठिन पैदल यात्रा की थकान भी बाबा के दरबार में पहुंचने की उत्कंठा के आगे फीकी पड़ जाती है. सावन में लाखों श्रद्धालु इसी विश्वास के साथ बासुकिनाथ पहुंचते हैं और बाबा के चरणों में अपनी मनोकामना अर्पित करते हैं.
हर-हर महादेव के जयघोष से शिवमय हो जाता है धाम
सावन में बासुकिनाथ पहुंचने वाले कांवरियों के जयघोष से पूरा धाम शिवमय हो जाता है. कंधे पर कांवर, हाथों में गंगाजल और जुबां पर बोल बम के जयघोष के साथ श्रद्धालु बाबा फौजदारीनाथ के दरबार में पहुंचते हैं. मंदिर परिसर से लेकर आसपास के मार्गों तक हर-हर महादेव और बोल बम की गूंज सुनाई देती है.
बाबा पर जलार्पण के बाद श्रद्धालु सुख, शांति, समृद्धि और मनवांछित फल की कामना करते हैं. बाबा का आशीर्वाद लेकर जब कांवरिये आगे की यात्रा पर रवाना होते हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष और मन में आस्था का भाव साफ दिखाई देता है. यही अटूट विश्वास बासुकिनाथ धाम की कांवर यात्रा को एक गहरी आध्यात्मिक अनुभूति में बदल देता है.
