दुमका के मसलिया से पवन कुमार की रिपोर्ट
Dumka News: दुमका जिले के मसलिया प्रखंड स्थित शिमला मध्य विद्यालय में पढ़ने आने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं की जिंदगी खतरे में है. विद्यालय भवन की दीवार और छत से सटकर 11 हजार वोल्ट का हाई-टेंशन बिजली तार गुजर रहा है, जो काफी नीचे तक झूल रहा है. इस खतरनाक स्थिति के कारण बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों में लगातार भय बना हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल परिसर में हर दिन बच्चे मौत के साए में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. विद्यालय आने वाले छोटे-छोटे बच्चे खेलते-कूदते रहते हैं. ऐसे में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. स्कूल प्रबंधन और ग्रामीणों ने कई बार बिजली विभाग को इस गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.
बारिश और तेज हवा में निकलती हैं चिंगारियां
ग्रामीणों और विद्यालय प्रबंधन के अनुसार बारिश और तेज हवा के दौरान हाई-टेंशन तार से चिंगारियां निकलती हैं. इससे पूरे स्कूल परिसर में दहशत फैल जाती है. कई बार बच्चे डर के कारण कक्षा से बाहर निकलने तक से घबराते हैं. विद्यालय भवन की छत और खिड़कियों के बेहद करीब से गुजर रहे तार के कारण कभी भी करंट फैलने की आशंका बनी रहती है. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे स्वभाव से चंचल होते हैं और खेलते समय उन्हें खतरे का अंदाजा नहीं रहता. यदि कोई बच्चा गलती से छत या खिड़की के पास पहुंच गया तो एक छोटी सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है. लोगों ने कहा कि भारतीय विद्युत नियमों के तहत सार्वजनिक भवनों और स्कूलों के पास हाई-टेंशन तारों की सुरक्षित दूरी तय की गयी है, लेकिन यहां इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है.
कई बार शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई
विद्यालय के सचिव सहदेव सिंह ने बताया कि इस गंभीर समस्या को लेकर बिजली विभाग के अधिकारियों को कई बार मौखिक रूप से जानकारी दी गयी है. इसके अलावा प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी कार्यालय को लिखित आवेदन देकर भी समस्या से अवगत कराया गया. बावजूद इसके अब तक विभाग की ओर से कोई पहल नहीं की गयी. विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि विभाग शायद किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है. यदि समय रहते इस झूलते तार को हटाया नहीं गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. स्कूल के शिक्षकों ने भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जतायी है.
अभिभावकों में डर, बच्चों को स्कूल भेजने से कतरा रहे लोग
हाई-टेंशन तार के कारण अभिभावकों में भी भारी डर का माहौल है. कई अभिभावकों ने कहा कि वे रोज डर के बीच अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं. उन्हें हर समय यह चिंता सताती रहती है कि कहीं कोई हादसा न हो जाये. अभिभावकों का कहना है कि यदि जल्द इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे अपने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देंगे. उनका कहना है कि शिक्षा जरूरी है, लेकिन बच्चों की जान उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है. ग्रामीणों ने मांग की है कि या तो बिजली तार को तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट किया जाये या फिर उसे सुरक्षित तरीके से कवर किया जाये.
ग्रामीणों ने दी आंदोलन और तालाबंदी की चेतावनी
इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. ग्रामीण रसोदी हांसदा और रामदेव टूडू ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि विभाग की उदासीनता किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रही है. अधिकारियों को बच्चों की सुरक्षा की कोई चिंता नहीं है. महिला ग्रामीण मिनी मरांडी ने कहा कि स्कूल के ऊपर झूल रहे तार की वजह से माता-पिता की नींद उड़ी हुई है. बच्चों को स्कूल भेजते समय हर दिन डर बना रहता है. वहीं ग्रामीण चैतन मुर्मू ने साफ चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर बिजली विभाग ने इस समस्या का समाधान नहीं किया तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे. ग्रामीणों ने कहा कि जरूरत पड़ी तो स्कूल में तालाबंदी की जायेगी और सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया जायेगा. लोगों का कहना है कि जब तक बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा.
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विभागीय लापरवाही पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले में बिजली विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, लेकिन जमीन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही. अब लोगों की मांग है कि जिला प्रशासन खुद इस मामले में हस्तक्षेप करे और स्कूल परिसर से हाई-टेंशन तार को तत्काल हटाने की व्यवस्था करे, ताकि बच्चों की जिंदगी सुरक्षित हो सके.
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