कभी पहचान रही हंसडीहा आलू मंडी आज अव्यवस्था के कारण संकट में

हंसडीहा का आलू अपनी बेहतर गुणवत्ता के कारण बिहार और झारखंड के कई दूरदराज़ इलाकों—विशेषकर भागलपुर, कहलगांव, साहिबगंज और पाकुड़ तक भेजा जाता रहा है.

हंसडीहा. आलू उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हंसडीहा क्षेत्र में इन दिनों हालात पहले जैसे नहीं रहे. किसान पूरी मेहनत और पूंजी लगाकर बेहतर आमदनी की उम्मीद करते हैं, लेकिन आलू की खेती में की गयी लागत के अनुरूप उन्हें लाभ नहीं मिल पा रहा है. इससे किसानों की उम्मीदें टूट रही हैं और उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. हंसडीहा का आलू अपनी बेहतर गुणवत्ता के कारण बिहार और झारखंड के कई दूरदराज़ इलाकों—विशेषकर भागलपुर, कहलगांव, साहिबगंज और पाकुड़ तक भेजा जाता रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर व्याप्त कुव्यवस्था और प्रशासनिक उदासीनता के कारण अब बाहरी व्यापारियों की आवाजाही घटती जा रही है. अधिकांश व्यापारी मंडी में आने के बजाय सीधे गांवों से ही आलू की खरीदारी करने लगे हैं. हटिया स्थित आलू मंडी से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलता था, लेकिन लंबे समय से यह मंडी सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. पहले लगभग चार महीने तक चलने वाली मंडी अब दिसंबर से फरवरी तक तीन महीने भी ठीक से नहीं चल पा रही. किसान तड़के सुबह अंधेरे में अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचते हैं, लेकिन मंडी परिसर का शेड पूरी तरह जर्जर होकर टूट चुका है. जो शेड बचे हैं, उन पर भी अनाधिकृत कब्जा होने से किसानों को आलू जमीन पर रखकर बिक्री करनी पड़ती है. मंडी तक पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क है, न ही परिसर में शौचालय और पेयजल की समुचित व्यवस्था. इसके अलावा अनाधिकृत रूप से व्यापारियों और वाहनों से अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं. विवाद से बचने के लिए बाहर से आने वाले व्यापारी और वाहन चालक मजबूरी में रुपये देने को विवश हो जाते हैं. इन गतिविधियों से स्थानीय पुलिस प्रशासन की अनभिज्ञता भी चिंता का विषय है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि हटिया परिसर का विधिवत बंदोबस्ती कर समुचित विकास किया जाए, तो यह मंडी किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है. रक्सा रंगनियां के किसान लालमोहन दास ने बताया कि वे अच्छी कीमत की उम्मीद में मंडी आते हैं, लेकिन व्यापारियों की कमी और अधिक आवक के कारण उचित मूल्य नहीं मिल पाता. वहीं मंडलडीह निवासी किसान कुंदन यादव ने कहा कि नए आलू का बाजार मूल्य काफी गिर गया है. 25 बोरी बीज लगाकर खेती करने के बावजूद उन्हें मात्र 9 रुपये प्रति किलो की दर से आलू बेचना पड़ रहा है. दोनों किसानों ने सरकार से आलू किसानों के हित में ठोस और लाभकारी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.

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Published by: Binay kumar

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