दुमका गांधी मैदान में दो फरवरी को झामुमो नेताओं का महाजुटान, भव्य रूप से मनाया जाएगा झारखंड दिवस

Jharkhand Day: दुमका के गांधी मैदान में 2 फरवरी को झारखंड दिवस को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के संकल्प के साथ झामुमो का महाजुटान होगा. प्रमंडलीय बैठक में नेताओं ने संगठन की मजबूती, एकजुटता और झारखंड आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने की अपील की. बसंत सोरेन, नलिन सोरेन सहित कई नेताओं ने तैयारियों, एसआईआर, पेसा कानून और जनजागरण पर जोर दिया. गुरुजी शिबू सोरेन की विचारधारा इस आयोजन की आत्मा होगी. पूरी खबर नीचे पढ़ें.

झारखंड स्थापना दिवस के लिए रायशुमारी करते झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतागण.

Jharkhand Day: दो फरवरी 2026 को झारखंड के स्थापना दिवस के मौके पर दुमका के गांधी मैदान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेताओं का महाजुटान होगा. इसके आयोजन को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के संकल्प के साथ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की प्रमंडलीय बैठक संपन्न हुई. बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संगठनात्मक मजबूती, एकजुटता और झारखंड आंदोलन की संघर्षशील विरासत को आगे बढ़ाने का आह्वान किया. वक्ताओं ने कहा कि भले ही गुरुजी शिबू सोरेन शारीरिक रूप से मंच पर उपस्थित नहीं होंगे, लेकिन उनकी सोच, विचार और संघर्ष की चेतना ही इस आयोजन की आत्मा होगी.

दुमका से तय होती थी झारखंड आंदोलन की दिशा

पूर्व मंत्री सह दुमका विधायक बसंत सोरेन ने कहा कि 2 फरवरी झारखंड के लिए केवल एक तारीख नहीं, बल्कि आंदोलन की आत्मा है. इसी गांधी मैदान के मंच से झारखंड आंदोलन की दिशा तय होती थी, जो आगे चलकर टोला-गांव तक पहुंची और हक-अधिकार की लड़ाई को मजबूती मिली. उन्होंने कहा कि गुरुजी की कमी जरूर महसूस होगी, लेकिन उनकी विचारधारा को सरकार और संगठन पूरी निष्ठा से आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने एसआईआर, केंद्र सरकार की नीतियों और पेसा कानून को लेकर जनता को सही जानकारी देने की जरूरत बताते हुए जिला, प्रखंड और पंचायत स्तर पर बैठकों के माध्यम से तैयारी तेज करने का आह्वान किया.

संघर्ष के दिनों की यादें और बेहतर व्यवस्था पर जोर

दुमका सांसद नलिन सोरेन ने आंदोलन के दिनों को याद करते हुए कहा कि पहले 2 फरवरी दुमका चलें के नारे के साथ दीवार लेखन होता था और साहिबगंज से मिहिजाम तक के लोग पैदल गांधी मैदान पहुंचते थे. प्रशासन की तमाम बाधाओं के बावजूद यह आयोजन हर साल नया कीर्तिमान बनाता रहा. इस बार भी कार्यकर्ता डुगडुगी के साथ कार्यक्रम में पहुंचेंगे. उन्होंने जिला-वार बस पार्किंग की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया.

संगठन की ताकत और निकाय चुनाव की रणनीति

मंत्री हफीजुल हसन अंसारी ने कहा कि बसंत सोरेन के नेतृत्व में इस बार झारखंड दिवस की तैयारी और भी बेहतर होगी. उन्होंने बताया कि पहले गांधी मैदान में ठंड से बचाव के लिए कोयला भट्टी जलती थी, जबकि अब रातभर चलने वाले आयोजन में इलेक्ट्रिक हीटर की व्यवस्था की जा रही है. उन्होंने कहा कि संताल परगना में गठबंधन ने 18 में 17 सीटें जीतकर अपनी ताकत दिखाई है और अब निकाय चुनावों में भी बेहतर प्रदर्शन जरूरी है. उन्होंने दीवार लेखन की परंपरा बनाए रखने, महिला संगठन को मजबूत करने और एसआईआर को लेकर सतर्क रहने की अपील की.

झामुमो के ऐतिहासिक संघर्षों को किया गया याद

महेशपुर विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि प्रमंडलीय बैठक की शुरुआत ही संगठनात्मक उद्देश्य से की गई है. उन्होंने अविभाजित संताल परगना को बनाए रखने के लिए झामुमो द्वारा किए गए ऐतिहासिक संघर्षों को याद किया. बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा द्वारा प्रमंडल विभाजन के प्रयासों का कोर्ट तक जाकर विरोध किया गया. तीर-धनुष पर लगे प्रतिबंध को हटवाने के लिए इंदिरा गांधी से मुलाकात तक करनी पड़ी. उन्होंने कहा कि झारखंड दिवस उन तमाम संघर्षों को याद करने और उनसे प्रेरणा लेने का दिन है. साथ ही उन्होंने वर्ष में दो-तीन बार प्रमंडलीय बैठक करने और कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया.

एसआईआर और पेसा कानून पर सतर्क रहने की अपील

लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि आयोजन को सफल बनाने के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होनी चाहिए. जिला कमेटी की बैठक जल्द होनी चाहिए, ताकि कार्यक्रम ऐतिहासिक बने. उन्होंने पेसा कानून को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने और 14 फरवरी से शुरू होने वाली एसआईआर प्रक्रिया को लेकर संगठन को पूरी तरह तैयार करने की जरूरत बताई.

गांव-गांव तक झंडा और हर गाड़ी में डुगडुगी

जामा विधायक डॉ लुइस मरांडी ने कहा कि झामुमो का झंडा गांव-गांव तक पहुंचे और हर छोटी-बड़ी गाड़ी में दिखे, तभी झारखंड दिवस का माहौल बनेगा. डुगडुगी और तीर-धनुष झामुमो की पहचान हैं. इसलिए हर गाड़ी में डुगडुगी की आवाज गूंजनी चाहिए. उन्होंने कहा कि गुरुजी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ते हुए उनकी कमी महसूस नहीं होने दी जाएगी.

गांधी मैदान से ही तय होती है झारखंड की दिशा

शिकारीपाड़ा विधायक आलोक सोरेन ने कहा कि गांधी मैदान के मंच से ही हमेशा तय हुआ है कि झारखंड किस दिशा में जाएगा. गुरुजी का नारा “अबुआ दिशोम, अबुआ राज” आज भी उतना ही प्रासंगिक है. उन्होंने कहा कि सत्ता में होने के कारण अब जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों बढ़ गई हैं. इसलिए, 2 फरवरी को आने वाले किसी भी कार्यकर्ता को परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करना सभी का दायित्व है.

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तीर-धनुष और डुगडुगी के साथ पहुंचने की अपील

बोरियो विधायक धनंजय सोरेन ने सभी कार्यकर्ताओं से अपील किया कि वे तीर-धनुष और डुगडुगी के साथ कार्यक्रम में पहुंचें और आयोजन को सफल बनाएं. उन्होंने कहा कि गुरुजी की कमी जरूर खलेगी, लेकिन एकजुट रहकर संगठन को मजबूत बनाना और विरोधियों को जवाब देना जरूरी है. उन्होंने पार्किंग व्यवस्था प्रखंडवार करने की भी बात कही.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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