दुमका के शिक्षक डॉ. सपन कुमार को मिलेगा राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार

दुमका के शिक्षक डॉ. सपन कुमार को राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा जाएगा. वे कम लागत में स्थानीय संसाधनों से शिक्षण नवाचार विकसित करने के लिए जाने जाते हैं. बंजर जमीन को हरा-भरा बनाने और पशु-पक्षियों के लिए दाना-पानी अभियान चलाने जैसे उनके प्रयासों को मान्यता मिली है.

प्रतिनिधि, बासुकिनाथ : शिक्षक दिवस के अवसर पर दुमका जिले के शिक्षक डॉ. सपन कुमार को राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. जरमुंडी प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय डुमरथर में कार्यरत डॉ. सपन कुमार को पांच सितंबर को रांची स्थित झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) के सभागार में आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा. इस संबंध में जेसीईआरटी रांची के निदेशक ने उन्हें समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है.

कम लागत में तैयार करते हैं शैक्षणिक नवाचार

डॉ. सपन कुमार कम लागत में स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर शैक्षणिक नवाचार विकसित करने के लिए जाने जाते हैं. उनके द्वारा तैयार विभिन्न नवाचारों की चर्चा राज्य के साथ-साथ देश-विदेश में भी हुई है. कोरोना काल में उनके द्वारा तैयार किया गया ब्लैकबोर्ड मॉडल काफी चर्चित रहा था. सीमित संसाधनों के बीच तैयार इस मॉडल का उपयोग शिक्षण कार्य जारी रखने में किया गया.

स्थानीय संसाधनों से तैयार करते हैं टीएलएम

डॉ. सपन कुमार प्रकृति में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर कम लागत में शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) तैयार करते रहे हैं. उनका उद्देश्य बच्चों को स्थानीय परिवेश और उपलब्ध संसाधनों से जोड़कर सीखने की प्रक्रिया को सरल और रुचिकर बनाना है. उनके नवाचारों के माध्यम से विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ समुदाय को भी जोड़ने का प्रयास किया गया है.

बंजर जमीन को बनाया हराभरा

विद्यालय परिसर और आसपास की बंजर जमीन को हरियाली में बदलने की दिशा में भी डॉ. सपन कुमार ने कार्य किया है. विद्यालय परिवार और समुदाय के सहयोग से पौधरोपण तथा पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दिया गया. इससे विद्यार्थियों में प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया.

विद्यालय को लगातार दूसरी बार मिली फाइव स्टार रेटिंग

विद्यालय के शैक्षणिक और सामुदायिक विकास में भी डॉ. सपन कुमार की भूमिका रही है. समुदाय एवं विद्यालय परिवार के सहयोग से विद्यालय को संबंधित मूल्यांकन क्षेत्र में लगातार दूसरे वर्ष फाइव स्टार रेटिंग प्राप्त हुई है. सुदूर आदिवासी क्षेत्र में स्थित विद्यालय में सीमित संसाधनों के बावजूद शैक्षणिक वातावरण और विद्यालय परिसर में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया गया है.

पशु-पक्षियों के लिए शुरू किया दाना-पानी अभियान

पर्यावरण संरक्षण के साथ पशु-पक्षियों के संरक्षण को लेकर भी डॉ. सपन कुमार ने दाना-पानी अभियान सहित कई कार्यक्रम शुरू किए हैं. इन अभियानों के माध्यम से विद्यार्थियों और ग्रामीण समुदाय को जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास किया गया.

सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित डुमरथर विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण, हरियाली और सामुदायिक सहभागिता में बदलाव लाने के लिए किये गये कार्यों को देखते हुए डॉ. सपन कुमार का चयन राज्यस्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए किया गया है. शिक्षक दिवस पर मिलने वाला यह सम्मान उनके नवाचार आधारित शिक्षण और विद्यालय विकास के प्रयासों को पहचान देगा.

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लेखक के बारे में

By आदित्यनाथ पत्रलेख

आदित्यनाथ पत्रलेख वर्ष 2011 से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। उन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया, दोनों में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की बारीकियां सीखीं और राजनीतिक, सामाजिक तथा विकासात्मक मुद्दों पर सटीक एवं निष्पक्ष रिपोर्टिंग की। जनहित से जुड़े विषयों पर फोकस्ड रिपोर्टिंग और तथ्यों को सत्य एवं तटस्थता के साथ प्रस्तुत करना उनकी कार्यशैली की प्रमुख पहचान है।

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