दो साल से बंद पड़ा 4000 मीट्रिक टन का कोल्ड स्टोरेज, झाड़ियों में गुम हुई किसानों की उम्मीद

सरैयाहाट का 4000 मीट्रिक टन क्षमता वाला अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज रखरखाव के अभाव में पिछले दो वर्षों से बंद पड़ा है. संचालक के निधन के बाद बंद हुई यह सुविधा किसानों की उम्मीदों पर भारी पड़ रही है, जिन्हें अपनी उपज औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है. जल्द पहल न होने पर करोड़ों की सरकारी संपत्ति बर्बाद हो सकती है.

प्रतिनिधि, सरैयाहाट. सरैयाहाट प्रखंड कार्यालय परिसर में स्थित चार हजार मीट्रिक टन क्षमता वाला अत्याधुनिक कोल्ड स्टोरेज पिछले करीब दो वर्षों से बंद पड़ा है. रखरखाव के अभाव में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह महत्वपूर्ण सरकारी सुविधा अब बदहाली की तस्वीर बन चुकी है. कोल्ड स्टोरेज का पूरा परिसर घनी झाड़ियों और कंटीली वनस्पतियों से घिर गया है, जबकि भवन और मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हैं.

करीब दो दशक के लंबे इंतजार के बाद सितंबर 2023 में स्थानीय विधायक प्रदीप यादव ने इस कोल्ड स्टोरेज का उद्घाटन किया था. शुरुआत में इसके संचालन से किसानों को काफी राहत मिली थी, लेकिन वर्ष 2024 में संचालक विजय कुमार के आकस्मिक निधन के बाद व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई. इसके बाद संबंधित विभाग की ओर से वैकल्पिक संचालक की व्यवस्था करने या कोल्ड स्टोरेज को दोबारा शुरू कराने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई.

कुछ महीनों की सुविधा के बाद बंद हो गया कोल्ड स्टोरेज

शुरुआती दौर में कोल्ड स्टोरेज के चालू रहने से क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने की सुविधा मिली थी. किसान टमाटर, मिर्च, आलू, गुड़ समेत विभिन्न कृषि उत्पादों को यहां भंडारित कर बाजार में बेहतर कीमत मिलने पर बेचते थे. इससे किसानों को फसल की तत्काल बिक्री की मजबूरी से राहत मिलती थी और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद रहती थी.

लेकिन संचालक के निधन के बाद कोल्ड स्टोरेज के ताले दोबारा नहीं खुले. सहकारिता या संबंधित विभाग की ओर से संचालन की वैकल्पिक व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण किसानों को फिर पुरानी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

करोड़ों की मशीनें धूल फांक रहीं, परिसर में पसरी झाड़ियां

वर्तमान में कोल्ड स्टोरेज की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है. भवन के आसपास कंटीली झाड़ियां उग आई हैं और पूरे परिसर में सन्नाटा पसरा रहता है. अत्याधुनिक मशीनें लंबे समय से बंद पड़ी हैं और रखरखाव के अभाव में इनके खराब होने का खतरा बढ़ता जा रहा है.

किसानों का कहना है कि समय रहते इसे चालू नहीं किया गया तो करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह सुविधा पूरी तरह बेकार हो सकती है. सरकारी राशि से तैयार इतनी बड़ी क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज का उपयोग नहीं होना क्षेत्र के किसानों के लिए चिंता का विषय है.

औने-पौने दाम पर उपज बेचने को मजबूर किसान

कोल्ड स्टोरेज बंद होने का सीधा असर किसानों की आमदनी पर पड़ रहा है. खासकर आलू, टमाटर और अन्य हरी सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के पास उपज सुरक्षित रखने का विकल्प नहीं है. नतीजतन उन्हें फसल तैयार होते ही खेत से ही बिचौलियों के हाथों औने-पौने दाम पर उपज बेचनी पड़ रही है.

किसानों का कहना है कि कई बार बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने के बावजूद वे फसल रोक नहीं पाते. घरों में लंबे समय तक भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण उपज खराब होने का खतरा रहता है. ऐसे में किसान मजबूरी में कम कीमत पर अपनी फसल बेच देते हैं.

25 से 30 हजार किसानों को मिल सकता है सीधा लाभ

स्थानीय किसानों के अनुसार सरैयाहाट प्रखंड में करीब 25 से 30 हजार किसान इस कोल्ड स्टोरेज के दोबारा शुरू होने से सीधे लाभान्वित हो सकते हैं. किसानों का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज शुरू होने से न केवल उनकी उपज सुरक्षित रहेगी, बल्कि उन्हें बाजार में बेहतर कीमत मिलने तक फसल रोककर रखने का विकल्प भी मिलेगा.

इसके अलावा आलू और बीज के भंडारण की सुविधा उपलब्ध होने से किसानों को पश्चिम बंगाल पर निर्भरता भी कम हो सकती है.

"अविलंब शुरू कराया जाए कोल्ड स्टोरेज"

महेंद्र यादव, स्थानीय किसान ने कहा, "यदि कोल्ड स्टोरेज दोबारा शुरू हो जाए, तो किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने में बड़ी सहूलियत मिलेगी. इससे उपज बर्बाद होने का डर खत्म होगा और बीज व आलू के लिए पश्चिम बंगाल पर किसानों की निर्भरता भी समाप्त होगी. सहकारिता विभाग इसे अविलंब चालू कराए."

वहीं नंदलाल राय, स्थानीय किसान ने कहा, "इस कोल्ड स्टोरेज से प्रखंड के करीब 25 से 30 हजार किसानों को सीधा फायदा मिल सकता है. सुविधा नहीं मिलने से किसान लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं. इतनी बड़ी सरकारी सुविधा का महज कुछ माह चलकर बंद हो जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है."

किसानों की मांग, विभाग जल्द करे पहल

किसानों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से कोल्ड स्टोरेज की स्थिति का निरीक्षण कर जल्द से जल्द इसके संचालन की व्यवस्था करने की मांग की है. किसानों का कहना है कि भवन और मशीनों को सुरक्षित रखने के लिए नियमित रखरखाव जरूरी है. यदि शीघ्र पहल नहीं की गई तो सरकारी संपत्ति के साथ-साथ किसानों की उम्मीदें भी पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी.

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लेखक के बारे में

By चंद्रकांत कुमार

पिछले 14 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रखंड स्तर पर सक्रिय हूं, जहां मैंने जमीनी मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का कार्य किया है. ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार से जुड़ी खबरों को निष्पक्ष और तथ्यपरक ढंग से प्रस्तुत करना मेरी प्राथमिकता रही है. पत्रकारिता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और जनहित की आवाज बनने का निरंतर प्रयास है.

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