रानीश्वर में एक साल से बंद पड़ी जलमीनार, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे पहाड़िया परिवार

रानीश्वर के चापुड़िया पहाड़िया टोला में एक साल से सोलर जलमीनार बंद पड़ी है, जिससे आदिम जनजाति के 25 परिवार पानी की किल्लत झेल रहे हैं. वहीं, पास के टोले में भी पेयजल योजना अधूरी है, जिससे ग्रामीण परेशान हैं.

रानीश्वर: प्रखंड अंतर्गत धानभाषा पंचायत के चापुड़िया पहाड़िया टोला में आदिम जनजाति समुदाय के लोगों के लिए लगायी गयी सोलर जलमीनार करीब एक साल से बंद पड़ी है. जलमीनार से पानी की आपूर्ति बंद होने के कारण ग्रामीणों को चापानल के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के स्कूल टोला में कल्याण विभाग की सीसीडी योजना के तहत सोलर वेस्ट ड्रिंकिंग वाटर सिस्टम जलमीनार लगाया गया था. योजना संख्या 6/18-19 बतायी गयी है. लेकिन करीब एक साल से जलमीनार से जलापूर्ति पूरी तरह बंद है.

25 पहाड़िया परिवारों के सामने पेयजल की परेशानी

इस टोले में आदिम जनजाति समुदाय के करीब 25 घर हैं. इसके अलावा यहां एक आंगनबाड़ी केंद्र और एक प्राथमिक विद्यालय भी संचालित होता है.

जलमीनार बंद होने के कारण ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए चापानल का सहारा लेना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि सोलर जलमीनार चालू रहने से उन्हें काफी सुविधा मिलती थी, लेकिन लंबे समय से बंद रहने के कारण पेयजल की समस्या बढ़ गयी है.

दूसरे टोले में योजना शुरू होकर रह गयी अधूरी

चापुड़िया पहाड़िया टोला से सटे एक दूसरे टोले में भी करीब 15 पहाड़िया परिवार रहते हैं. यहां ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सोलर वेस्ट ड्रिंकिंग वाटर सिस्टम लगाने की योजना शुरू की गयी थी.

इसके लिए डीप बोरिंग भी की गयी थी और जलमीनार लगाने के लिए कंक्रीट के पिलर का काम भी शुरू किया गया था. लेकिन किसी कारणवश योजना को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया गया.

कुएं का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण

योजना अधूरी रहने के कारण दूसरे टोले के ग्रामीणों के सामने भी पेयजल का संकट बना हुआ है. ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए कुएं पर निर्भर रहना पड़ रहा है.

एक तरफ जहां पहले से लगी जलमीनार करीब एक साल से बंद है, वहीं दूसरी ओर नयी जलापूर्ति योजना का काम भी पूरा नहीं हो सका है. ऐसे में दोनों टोलों के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है.

ग्रामीणों को इंतजार, कब चालू होगी जलापूर्ति

ग्रामीणों का कहना है कि आदिम जनजाति बहुल इलाके में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का लंबे समय तक बाधित रहना चिंता का विषय है. ग्रामीण चाहते हैं कि बंद पड़ी जलमीनार की जल्द मरम्मत कराकर जलापूर्ति शुरू की जाए और अधूरी योजना को भी पूरा कराया जाए, ताकि दोनों टोलों के लोगों को नियमित पेयजल मिल सके.

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लेखक के बारे में

By साधन सेन

वर्ष 1999 के नवंबर महीने से प्रभात खबर अखबार में पत्रकारिता शुरू की. दुमका के रानीश्वर प्रखंड से पत्रकारिता करते हुए जनहित की खबरों को प्राथमिकता देना, हमेशा मेरा ध्येय रहा है.

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